Swami Avimukteshwaranand FIR: यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के घर पहुंची यूपी पुलिस

यूपी पुलिस कथित यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आवास पर पहुँची। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य और उनके शिष्य पर POCSO एक्ट और BNS की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। स्वामी ने आरोपों को नकारते हुए पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग करने और 'ईश्वर की अदालत' से क्लीन चिट मिलने की बात कही है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Swami Avimukteshwaranand FIR: प्रयागराज की ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सोमवार को उत्तर प्रदेश पुलिस कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पूछताछ और गिरफ्तारी की प्रक्रिया के लिए उनके आवास पर पहुँची। यह कार्रवाई एक विशेष अदालत के उस आदेश के बाद हुई है जिसमें नाबालिगों के साथ यौन अपराध (POCSO) जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

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पुलिस जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का भरोसा

जब पुलिस टीम शंकराचार्य के घर पहुँची, तो उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि वह कानून की प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “हम किसी भी तरह से पुलिस का विरोध नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून अपना काम कर रहा है और वे पुलिस अधिकारियों की कार्यवाही के साथ खड़े हैं।

जनता, अंतरात्मा और ईश्वर की अदालत से ‘क्लीन चिट’ का दावा

मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य ने आध्यात्मिक और नैतिक पक्ष रखते हुए खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उनके लिए तीन अदालतें सर्वोपरि हैं: जनता की अदालत (निचली अदालत), स्वयं की अंतरात्मा (मध्यम अदालत) और ईश्वर (सर्वोच्च न्यायालय)। स्वामी ने दावा किया, “मुझे इन तीनों ही अदालतों से क्लीन चिट मिल गई है। जनता सब देख रही है और अंततः वही फैसला करेगी।” उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी अंतरात्मा और भगवान जानते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।

झूंसी थाने में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत FIR दर्ज

यह पूरा मामला पिछले हफ्ते तब गरमाया जब प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में शनिवार देर रात करीब 11:30 बजे एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 351(3) के साथ-साथ ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट’ (पॉक्सो कानून) की धारा 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 को शामिल किया गया है। इसमें शंकराचार्य के अलावा उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को भी नामजद किया गया है।

नाबालिगों से जुड़े यौन अपराधों के गंभीर आरोपों की समयरेखा

दर्ज की गई शिकायत के अनुसार, ये कथित घटनाएं 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच की बताई जा रही हैं। आरोप बेहद संवेदनशील हैं क्योंकि इनमें नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण का जिक्र है। पुलिस के अनुसार, ज्यूडिशियल निर्देशों का पालन करते हुए साक्ष्यों को एकत्रित किया जा रहा है ताकि इस गंभीर आपराधिक मामले की तह तक पहुँचा जा सके।

स्पेशल पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश और पुलिस जांच रिपोर्ट

विशेष न्यायाधीश (POCSO) विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले में दो कथित पीड़ितों के बयानों, स्वतंत्र गवाहों की गवाही और प्रयागराज के सहायक पुलिस आयुक्त द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन किया। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड संज्ञेय (Cognizable) और दंडनीय अपराधों की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं, जिसके बाद झूंसी थाना प्रभारी को बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया।

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