Screen Time Effects: मोबाइल से बनाएं सही दूरी, याददाश्त और फोकस बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 10 तरीके

Screen Time Effects: क्या आपका स्मार्टफोन धीरे-धीरे आपकी याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है? AIIMS की मनोचिकित्सक ने स्क्रीन टाइम कम करने के 10 आसान और प्रभावी तरीके बताए हैं। जानिए कौन-सी आदतें बदलकर आप अपने दिमाग को पहले से ज्यादा तेज और सक्रिय बना सकते हैं।

याददाश्त और फोकस बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 10 तरीके

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 3, 2026

Screen Time Effects: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। चाहे ऑफिस का काम हो, पढ़ाई, ऑनलाइन पेमेंट, सोशल मीडिया या मनोरंजन, लगभग हर काम के लिए लोग मोबाइल पर निर्भर हैं। यही वजह है कि दिन की शुरुआत से लेकर रात तक अधिकांश समय स्क्रीन के सामने ही बीत जाता है।

कई लोग सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल देखते हैं और रात में सोने से पहले भी लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताते रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता कि वह रोज कई घंटे फोन पर खर्च कर रहा है।

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जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम क्यों है चिंता का विषय?

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन जरूरत से अधिक स्क्रीन टाइम मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है। बिना किसी उद्देश्य के लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या गेम खेलना समय की बर्बादी के साथ-साथ कई मानसिक समस्याओं की वजह भी बन सकता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है, नींद प्रभावित होती है और दिमाग लगातार डिजिटल जानकारी से भरा रहता है। इसका असर याददाश्त, एकाग्रता और सोचने-समझने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

AIIMS विशेषज्ञ ने क्या कहा?

एम्स (AIIMS) के मनोचिकित्सा विभाग की प्रोफेसर के अनुसार, लोगों को स्मार्टफोन पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। असली जरूरत यह है कि मोबाइल का उपयोग समझदारी, संतुलन और सही उद्देश्य के साथ किया जाए। उनका कहना है कि तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाने के लिए है, लेकिन यदि उसका उपयोग नियंत्रण से बाहर हो जाए तो यही सुविधा परेशानी का कारण बन सकती है।

हर उम्र के लोग हो रहे प्रभावित

आज केवल युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे, किशोर, कामकाजी लोग और बुजुर्ग भी लंबे समय तक मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। कई लोग परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने की बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय देना पसंद करते हैं। इसका असर सामाजिक जीवन पर भी दिखाई देता है। आमने-सामने बातचीत कम हो रही है और डिजिटल दुनिया पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।

अधिक मोबाइल इस्तेमाल के नुकसान

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम कई समस्याओं को जन्म दे सकता है। इनमें तनाव, चिंता, अकेलापन, ध्यान भटकना, चिड़चिड़ापन और नींद की गड़बड़ी जैसी परेशानियां शामिल हैं। इसके अलावा लगातार मोबाइल देखने से कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और व्यक्ति वास्तविक जीवन की गतिविधियों से दूर होने लगता है।

फोन की लत को कैसे पहचानें?

यदि आप बिना किसी खास कारण के बार-बार मोबाइल चेक करते हैं, नोटिफिकेशन न आने पर भी फोन देखने की इच्छा होती है या कुछ समय मोबाइल से दूर रहने पर बेचैनी महसूस होती है, तो यह डिजिटल निर्भरता का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अपनी आदतों पर ध्यान देना और स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी हो जाता है।

स्क्रीन टाइम कम करने के आसान तरीके

विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर स्क्रीन टाइम को काफी हद तक कम किया जा सकता है—

  • मोबाइल का उपयोग केवल जरूरी कामों के लिए करें।
  • सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बना लें।
  • सुबह उठते ही तुरंत फोन देखने की आदत छोड़ें।
  • सोशल मीडिया के लिए निश्चित समय तय करें।
  • अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद रखें।
  • खाली समय में किताब पढ़ें, व्यायाम करें या परिवार के साथ समय बिताएं।
  • भोजन करते समय मोबाइल का उपयोग न करें।
  • रोजाना कुछ समय डिजिटल डिटॉक्स के लिए निकालें।
  • बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान दें।
  • अपने दिनभर के मोबाइल उपयोग की नियमित समीक्षा करें।

संतुलित उपयोग ही है सबसे बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल आज की जरूरत है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग ही मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सही है। यदि स्क्रीन टाइम सीमित रखा जाए और वास्तविक जीवन की गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाए, तो याददाश्त, एकाग्रता और रचनात्मकता में भी सकारात्मक सुधार देखा जा सकता है। इसलिए तकनीक का उपयोग करें, लेकिन उसे अपनी दिनचर्या पर हावी न होने दें।

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