UP Vidhan Sabha Chunav 2027: यूपी एक ऐसा राज्य है जो देश की राजनीति की दिशा तय करता है. ऐसा प्रदेश जिसकी सियासी हनक ऐसी कि केंद्र सरकार भी खौफ खाती है. सबसे ज्यादा लोकसभा और विधानसभा सीटों वाले इस प्रदेश ने देश को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिए है और तो और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस राज्य की सियासी अहमियत बखूबी जानते है.यही कारण है कि गुजरात से होने के बावजूद उन्होंने देश का नेतृत्व करने के लिए यूपी के काशी को चुना.सियासी गलियारों में पुरानी कहावत है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है. इसी यूपी में अब चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है.
यूपी का सियासी पारा हाई
सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गये है. कही गठबंधनों के लिए तय-तोड़ हो रहा है तो कही जातीय और धार्मिक खेमेबंदी को अपने पाले में करने की कवायद. आगामी विधानसभा चुनाव में किस सियासी दल का परचम बुलंद होगा यह तो चुनाव बाद नतीजों से पता चलेगा लेकिन हम आपको बताते है कि बीते तीन विधानसभा चुनावों में हर विधानसभा क्षेत्र में यूपी का सियासी मिजाज कैसा रहा है…
लखनऊ की 9 सीटों में से 7 पर बीजेपी का कब्जा

सबसे पहले हम आपको ले चलते है प्रदेश की राजधानी लखनऊ में, अदब और तहजीब के इस शहर में नौ विधानसभा सीटे है… मौजूदा समय में सात पर भाजपा का कब्जा है तो दो पर समाजवादी पार्टी का. बात करते है राजधानी लखनऊ की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल सरोजिनी नगर विधानसभा सीट की जो कि, राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह सीट मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का मिश्रण देखने को मिलता है. यही वजह है कि यहां का चुनावी गणित हर बार दिलचस्प रहता है.
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI), चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और ऐतिहासिक राजा बिजली पासी किला जैसे महत्वपूर्ण स्थल इसी विधानसभा क्षेत्र में स्थित हैं. विकास, जातीय समीकरण और शहरीकरण—इन तीनों का प्रभाव इस सीट के चुनावी परिणामों पर साफ दिखाई देता है.
सरोजिनी नगर विधानसभा का इतिहास
बताते चले कि, सरोजिनी नगर विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1967 में हुआ था. उस समय कांग्रेस का इस सीट पर मजबूत प्रभाव था. कांग्रेस के दिग्गज नेता राजा विजय कुमार त्रिपाठी ने यहां से पांच बार जीत दर्ज कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया.
हालांकि, समय के साथ इस सीट की राजनीति बदलती गई. 1990 के दशक के बाद जब उत्तर प्रदेश की राजनीति मंडल और कमंडल की ओर बढ़ी, तब यह सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच झूलती रही। भाजपा को यहां पहली जीत 2017 में मिली.
नजर डालते है चुनावी इतिहास
1967
कांग्रेस के विजय कुमार त्रिपाठी पहली बार विधायक बने।
1969
कांग्रेस के चंद्र भानु गुप्त ने चुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी।
1974
कांग्रेस के विजय कुमार त्रिपाठी ने दोबारा जीत दर्ज की।
1977
जनता पार्टी के छेदा सिंह चौहान ने कांग्रेस से सीट छीन ली।
1980
कांग्रेस ने वापसी की और विजय कुमार त्रिपाठी फिर विधायक बने।
1985
निर्दलीय उम्मीदवार शारदा प्रताप शुक्ला ने शानदार जीत हासिल की।
1989
जनता दल के टिकट पर शारदा प्रताप शुक्ला ने दोबारा जीत दर्ज की।
1991
कांग्रेस के विजय कुमार त्रिपाठी ने पांचवीं बार जीत हासिल कर इतिहास बनाया।
1993
समाजवादी पार्टी के श्याम किशोर यादव विधायक बने।
1996
समाजवादी पार्टी ने लगातार दूसरी बार सीट बरकरार रखी।
2002
बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद इरशाद खान ने जीत दर्ज की।
2007
बसपा के मोहम्मद इरशाद खान लगातार दूसरी बार विधायक बने।
2012
समाजवादी पार्टी के शारदा प्रताप शुक्ला ने सीट वापस हासिल की।
2017
भाजपा की स्वाति सिंह ने पहली बार कमल खिलाया और पार्टी का इस सीट पर खाता खोला।
2022
भाजपा उम्मीदवार और पूर्व ईडी संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को 56,186 वोटों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। चुनाव लड़ने से पहले उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से वीआरएस लिया था।
2022 विधानसभा चुनाव काफी चर्चा में रहा

आपको बता दे कि, साल 2022 का चुनाव इस सीट पर काफी चर्चित रहा. भाजपा ने पूर्व ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह को मैदान में उतारा जबकि समाजवादी पार्टी ने पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा पर दांव लगाया.
परिणाम
- राजेश्वर सिंह (भाजपा) – विजेता
- अभिषेक मिश्रा (सपा) – पराजित
- जीत का अंतर – 56,186 वोट
2024 लोकसभा चुनाव का असर
सरोजिनी नगर विधानसभा मोहनलालगंज लोकसभा सीट का हिस्सा है. 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के आर.के. चौधरी ने भाजपा के कौशल किशोर को 70,292 वोटों से हराया। इस नतीजे ने यह संकेत दिया कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाताओं का रुझान अलग-अलग भी हो सकता है.
जातीय और सामाजिक समीकरण
सरोजिनी नगर विधानसभा का चुनाव केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों पर भी काफी हद तक निर्भर करता है.
यहां प्रमुख मतदाता वर्ग हैं—
- दलित
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- ब्राह्मण
- ठाकुर
- वैश्य
- शहरी मध्यम वर्ग
- ग्रामीण किसान मतदाता
शहरी और ग्रामीण मतदाताओं की अलग-अलग प्राथमिकताएं होने के कारण प्रत्याशियों को संतुलित रणनीति बनानी पड़ती है.
भाजपा की मजबूत होती पकड़
साल 2012 के बाद इस क्षेत्र में तेजी से नई कॉलोनियों और आवासीय परियोजनाओं का विस्तार हुआ. इससे शहरी मतदाताओं की संख्या बढ़ी और भाजपा को इसका लाभ मिला. 2017 में पहली बार भाजपा ने यहां जीत दर्ज की और 2022 में बड़ी जीत के साथ अपनी पकड़ और मजबूत कर ली.
प्रमुख पहचान
- मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा
- SGPGI स्थित
- चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
- राजा बिजली पासी किला
- शहरी और ग्रामीण मिश्रित विधानसभा
राजधानी लखनऊ की सबसे महत्वपूर्ण सीटों में शामिल
सरोजिनी नगर विधानसभा उत्तर प्रदेश की उन चुनिंदा सीटों में शामिल है जहां राजनीतिक इतिहास, सामाजिक समीकरण और तेजी से हो रहा शहरी विकास—तीनों चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं. कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व से लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के दौर तथा अब भाजपा की मजबूत उपस्थिति तक, इस सीट ने प्रदेश की बदलती राजनीति को करीब से देखा है. साल 2022 में भाजपा की बड़ी जीत और 2024 लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की बढ़त यह बताती है कि आने वाले चुनावों में भी सरोजिनी नगर उत्तर प्रदेश की सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों में बनी रहेगी.










