UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों बयानबाजी का दौर बेहद गर्म है। सुभासपा अध्यक्ष और यूपी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) में बहुत जल्द बड़ी टूट होने वाली है। राजभर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर यहां तक लिख दिया कि सपा में फूट होकर ही रहेगी। इस सियासी घमासान के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मोर्चा संभालते हुए राजभर के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि राजभर किसी कथित पत्र के आधार पर यह हवा-हवाई बातें कर रहे हैं, जिसमें दावा किया गया था कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने देश के गृह मंत्री अमित शाह को कोई गोपनीय चिट्ठी सौंपी थी। संजय सिंह ने इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर करते हुए इस राजनीतिक दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
रामगोपाल यादव की अमित शाह को ‘कथित चिट्ठी’ का सच
बताते चले कि, सपा में बिखराव और अंतर्कलह के दावों पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने मीडिया के सामने आकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा, “जिस पत्र को लेकर ओम प्रकाश राजभर इतना बड़ा दावा कर रहे हैं, मैंने उस चिट्ठी की असलियत का पता लगाया है।” संजय सिंह ने चुटकी लेते हुए आगे कहा कि असल में रामगोपाल जी ने अमित शाह को यह लिखकर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ही दो-तिहाई सांसद टूटकर इस तरफ (विपक्ष में) आ जाएं। संजय सिंह के इस बयान ने राजभर के दावों की हवा निकाल दी है और यह साफ कर दिया है कि विपक्षी एकजुटता पूरी तरह कायम है, जबकि सत्तापक्ष के दावों में कोई ठोस सच्चाई नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी और चंपत राय पर गंभीर आरोप
इसके बाद संजय सिंह ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और धन के गबन के आरोपों को लेकर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “पहली बात तो यह है कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी (SIT) महज एक झुनझुना है, जिससे मुख्य दोषियों को बचाया जा रहा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसे की बरामदगी हो चुकी है और चढ़ावे में सैकड़ों करोड़ रुपये की चोरी के पुख्ता सबूत व साक्ष्य सामने आ चुके हैं, तो इसके बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?
उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि चंपत राय का नाम हर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार में आ रहा है। उन्होंने पूर्व के मामलों को दोहराते हुए कहा कि इसी व्यक्ति ने सुल्तान अंसारी से 2 करोड़ रुपये की जमीन 18 करोड़ में और 3 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में खरीदी थी, फिर भी वह ट्रस्ट में बने हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग
धार्मिक न्यास में हुए इस कथित घोटाले की गहराई को रेखांकित करते हुए राज्यसभा सांसद ने मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की जोरदार मांग की। संजय सिंह ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह भ्रष्टाचार कितना बड़ा और व्यापक है, क्योंकि यह अवैध खेल कई वर्षों से लगातार चल रहा है।
उन्होंने मांग की कि इस महाघोटाले में जितने भी रसूखदार लोग शामिल हैं, उन्हें बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाना चाहिए। सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में और एक तय समय सीमा (Time-bound Enquiry) के भीतर होनी चाहिए, तभी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है; वरना सरकारी एजेंसियों की ढीली कार्यप्रणाली के कारण अदालत में केवल ‘तारीख पर तारीख’ का अंतहीन सिलसिला चलता रहेगा।
“बीजेपी में हो रहा है ब्राह्मण समाज का सबसे बड़ा अपमान”
प्रेस वार्ता के अंत में जातिगत राजनीति और सामाजिक सम्मान से जुड़े एक तीखे सवाल का जवाब देते हुए आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए। संजय सिंह ने दावा किया, “वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में अगर देखा जाए तो ब्राह्मणों का सबसे ज्यादा अपमान और उत्पीड़न कहीं हो रहा है, तो वह खुद बीजेपी के शासनकाल में हो रहा है।” उन्होंने सत्तापक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि भगवा पार्टी के भीतर और सरकार में ब्राह्मण समाज के नेताओं व आम नागरिकों की उपेक्षा और तिरस्कार के एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 365 जीवंत उदाहरण आपको देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें जनता समय आने पर जरूर याद रखेगी।










