Sanjay Raut on LPG Crisis: गैस संकट पर संजय राउत का सरकार पर करारा प्रहार, ‘सिर्फ नमो-नमो जपो, पाइप लेकर घर आएंगे लोग’

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत में फैले गैस संकट पर संजय राउत ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एलपीजी की उपलब्धता पर देश को गुमराह कर रही है, जबकि जनता सिलेंडर के लिए मीलों लंबी कतारों में खड़ी है। क्या राउत का यह हमला सरकार को ठोस कदम उठाने पर मजबूर करेगा?

Sanjay Raut on LPG Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 13, 2026

Sanjay Raut on LPG Crisis: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सदन में दावा करती है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। राउत ने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि वे चुनाव प्रचार से समय निकालकर बाहर आएं और जनता का हाल देखें। उन्होंने इस संकट की तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा कि एक बार फिर देश की आम जनता को सड़कों पर कतारों में खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया गया है।

‘गटर गैस’ के वादे पर तंज और आम आदमी की बेबसी

संजय राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों के घरों में स्थिति शायद ठीक होगी, क्योंकि उनके लिए गैस इजरायल या राष्ट्रपति ट्रंप के माध्यम से आती होगी। लेकिन आम जनता के घरों में चूल्हे बुझ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के पुराने बयान को याद दिलाते हुए तंज कसा कि सरकार ने ‘गटर से गैस’ निकालने का वादा किया था, तो अब उन गटरों पर प्लांट क्यों नहीं लगाए जा रहे? राउत के अनुसार, बेरोजगारी और महंगाई के बीच ईंधन की इस कमी ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है।

संसद से सड़क तक विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन

गैस संकट का मुद्दा अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और तत्काल आपूर्ति बहाल करने की मांग की। वहीं, संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक सरकार इस संकट का ठोस समाधान नहीं निकालती और जमाखोरी पर लगाम नहीं लगाती, तब तक उनका संघर्ष सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा।

पटना से वाराणसी तक: छात्रों और आम लोगों की बढ़ती मुश्किलें

बिहार की राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र गैस की किल्लत से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। छोटे सिलेंडर का उपयोग करने वाले इन छात्रों का कहना है कि अब दुकानदार उनसे मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। जो गैस पहले 90-100 रुपये में मिलती थी, उसके लिए अब 300 से 400 रुपये तक मांगे जा रहे हैं। वहीं, वाराणसी के बाजारों में भी गैस न मिलने के कारण हाहाकार मचा है। लोगों का कहना है कि सिलेंडर की बुकिंग के हफ्तों बाद भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे रोजमर्रा का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

विकल्प की तलाश: इंडक्शन चूल्हों की मांग में भारी उछाल

एलपीजी की अनुपलब्धता ने बाजारों में बिजली से चलने वाले ‘इंडक्शन’ चूल्हों की मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया है। वाराणसी और चंडीगढ़ जैसे शहरों में इंडक्शन की बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुकानदारों का कहना है कि स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। स्थिति यह है कि शिमला जैसे पहाड़ी इलाकों में स्टॉक खत्म होने के बाद लोग इंडक्शन खरीदने के लिए चंडीगढ़ तक का रुख कर रहे हैं। हालांकि, बिजली बिल बढ़ने के डर के बावजूद, खाना बनाने की मजबूरी में लोग भारी निवेश करने को विवश हैं।

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