Samrat Choudhary CM : बिहार में सम्राट युग की शुरुआत, नीतीश के चहते होंगे नए मुख्यमंत्री, कल होगा शपथग्रहण

बिहार की सत्ता में महा-भूकंप: नीतीश युग के अंत के साथ ही सम्राट चौधरी के हाथों में होगी बिहार की कमान! क्या कल होने वाला शपथ ग्रहण राज्य में बीजेपी के पूर्ण वर्चस्व की शुरुआत है? जानिए उन अनसुनी शर्तों और गुप्त बैठकों के बारे में जिन्होंने रातों-रात बदल दिया बिहार का इतिहास!

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 14, 2026

Samrat Choudhary CM : बिहार की राजनीति में एक बड़े सत्ता परिवर्तन पर मुहर लग गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सम्राट चौधरी को अपना नया नेता चुन लिया है, जिसके बाद अब उनका बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनना तय है। एनडीए (NDA) की संयुक्त बैठक के बाद उनके नाम की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। राजनैतिक हलकों में इस खबर के आते ही उत्साह का माहौल है। जानकारी के अनुसार, कल यानी 15 अप्रैल को पटना के लोकभवन में एक भव्य शपथग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।

नीतीश कुमार का इस्तीफा: राजभवन में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण

आज दोपहर बिहार की राजनीति ने उस समय करवट ली जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। विशेष बात यह रही कि वे सम्राट चौधरी और विजय चौधरी के साथ एक ही गाड़ी में सवार होकर राजभवन पहुंचे, जो गठबंधन के भीतर एकता का संदेश दे रहा था। राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंपने के बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक सकारात्मक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि अब नई सरकार बिहार की जिम्मेदारी संभालेगी और उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में भी बिहार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने नई सरकार को अपने पूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन का भरोसा भी दिया।

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर: आरजेडी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक

57 वर्षीय सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति का एक अनुभवी चेहरा हैं। मुंगेर जिले से आने वाले सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इससे पहले वे बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की भूमिका भी सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। उनकी राजनीति की जड़ें जमीनी स्तर से जुड़ी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आरजेडी (RJD) से की थी, लेकिन समय के साथ वे अपनी विशिष्ट कार्यशैली के दम पर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के भरोसेमंद बने और आज राज्य के सर्वोच्च पद पर पहुंचने जा रहे हैं।

विरासत में मिली राजनीति: शकुनी चौधरी के बेटे ने रचा नया इतिहास

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। वे बिहार के कद्दावर नेता शकुनी चौधरी के पुत्र हैं। शकुनी चौधरी न केवल समता पार्टी के संस्थापकों में से एक थे, बल्कि वे लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी भी माने जाते थे। अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सम्राट ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। हालांकि 1995 में उन्हें एक राजनीतिक मामले के कारण जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 1999 में वे राबड़ी देवी की सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्रियों में से एक (कृषि मंत्री) बने थे।

अनुभव का लंबा सफर: कई सरकारों में मंत्री रहने का तजुर्बा

सम्राट चौधरी का चुनावी रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। वे साल 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। साल 2014 में वे जेडीयू में शामिल हुए और जीतन राम मांझी की सरकार में शहरी विकास एवं आवास मंत्री बने। 2018 में बीजेपी का दामन थामने के बाद उन्होंने पंचायती राज मंत्री के रूप में सराहनीय काम किया। पिछले साल (2025) हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने तारापुर सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। अब एक अनुभवी मंत्री और कुशल संगठनकर्ता के रूप में सम्राट चौधरी बिहार के विकास की एक नई पटकथा लिखने के लिए तैयार हैं।

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