Saharanpur News: सहारनपुर में मलबे के नीचे क्या मिला? ASI ने कुएं जैसी संरचना के लिए सैंपल लिए

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे के नीचे मिली करीब 20 फीट गहरी कुएं जैसी संरचना की ASI ने जांच शुरू कर दी है। लखौरी ईंटों से बनी इस संरचना के सैंपल लिए गए हैं। पुरातत्व विभाग का कहना है कि अभी इसे पूरी तरह कुआं कहना जल्दबाजी होगी।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 8, 2026

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे के नीचे मिली कथित कुएं जैसी संरचना अब जांच के घेरे में है। करीब 20 फुट गहरी और लगभग 3 से 4 फुट चौड़ी बताई जा रही इस संरचना का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने मौके से सैंपल भी लिए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। फिलहाल प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस संरचना को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।

ASI ने मौके पर पहुंचकर शुरू की जांच

बताते चले कि, ASI की टीम संरचना का निरीक्षण करने के लिए सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। पुरातत्व विभाग के डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि पहली नजर में यह संरचना वास्तुकला से जुड़ी हुई दिखाई देती है। हालांकि, इसे अभी पूरी तरह कुआं कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने इसे फिलहाल कुएं जैसी संरचना बताया है। टीम ने इसके निर्माण और पुराने होने से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए सैंपल भी लिए हैं।

सहारनपुर की कुएं जैसी संरचना कितनी पुरानी?

डॉ. मनोज कुमार यादव के मुताबिक, मौके पर दिखाई दे रही संरचना की चौड़ाई करीब तीन से चार फीट है, जबकि इसकी गहराई लगभग 20 फीट बताई जा रही है। खास बात यह है कि संरचना के निर्माण में लखौरी ईंटों का इस्तेमाल दिखाई दे रहा है। इन ईंटों को आम तौर पर लगभग 200 से 250 साल पुराना माना जाता है। ऐसे में इस संरचना की ऐतिहासिकता को लेकर जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

लखौरी ईंटों से बनी संरचना ने बढ़ाई ऐतिहासिक जांच

पुरातत्व विभाग की टीम अब सैंपल की जांच के आधार पर संरचना से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि केवल निर्माण सामग्री और शुरुआती निरीक्षण के आधार पर इसकी उम्र या वास्तविक स्वरूप को लेकर कोई अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। अगर आगे की जांच में अतिरिक्त ऐतिहासिक साक्ष्य सामने आते हैं, तो इस संरचना की विस्तृत जांच या खुदाई का रास्ता खुल सकता है।

सहारनपुर कुआं की खुदाई पर फैसला कौन लेगा?

डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि संरचना की आगे खुदाई की जाएगी या नहीं, इसका फैसला पुरातत्व विभाग अकेले नहीं करेगा। इसके लिए प्रशासन और शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल ASI ने मौके का निरीक्षण कर सैंपल जुटाए हैं और उनकी जांच जारी है। जांच के नतीजों के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

सहारनपुर की प्राचीन संरचना को किसी शासक से जोड़ना जल्दबाजी

आपको बता दे कि, सहारनपुर के इतिहास और यहां शासन करने वाले विभिन्न शासकों के संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा कि इस क्षेत्र में अलग-अलग समय में कई शासक आए हैं। हालांकि, मौजूदा संरचना को अभी किसी विशेष शासक या काल से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। इसके लिए ठोस ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण जरूरी होंगे।

सहारनपुर कुआं में पानी और दीवारों की स्थिति

अधिकारियों के मुताबिक, इस संरचना में पानी का स्तर फिलहाल काफी नीचे चला गया है। निरीक्षण के दौरान इसकी दीवारों पर किसी तरह की विशेष आकृति या स्पष्ट निशान भी नहीं मिले हैं। ऐसे में अभी यह कहना मुश्किल है कि इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था। आने वाली जांच और संभावित खुदाई से ही इसके वास्तविक स्वरूप को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

CCTV निगरानी में सहारनपुर की कुएं जैसी संरचना

ASI की जांच के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने संरचना के आसपास सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है। किसी भी तरह की छेड़छाड़ या अनधिकृत गतिविधि को रोकने के लिए मौके पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी रखी जाएगी।

फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मिली यह संरचना कई सवाल खड़े कर रही है, लेकिन ASI की जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब सबकी नजर सैंपल की जांच और प्रशासन के अगले फैसले पर है। यही जांच बताएगी कि मलबे के नीचे मिली यह संरचना वास्तव में पुराना कुआं है या किसी दूसरी ऐतिहासिक वास्तुकला का हिस्सा।