Sabarimala Gold Case: सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामला, मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को मिली कानूनी जमानत

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से 4.5 किलोग्राम से अधिक सोना चोरी करने के मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को कोर्ट ने जमानत दे दी है। पुलिस द्वारा 90 दिनों के भीतर चार्जशीट पेश न कर पाने के कारण उसे यह राहत मिली है। लेकिन क्या वह जेल से बाहर आ पाएगा?

Sabarimala Gold Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 20, 2026

Sabarimala Gold Case: केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हुए सनसनीखेज स्वर्ण चोरी मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। मामले के मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को 90 दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद जमानत मिल गई है। यह जमानत किसी गुण-दोष के आधार पर नहीं, बल्कि जांच एजेंसी की विफलता के कारण मिली है। निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल न कर पाने की वजह से अदालत ने आरोपी को ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ (Default Bail) का लाभ दिया है। इस फैसले ने मंदिर प्रशासन और जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

90 दिन की समय सीमा समाप्त: क्यों मिली कानूनी जमानत?

भारतीय दंड प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, किसी भी गंभीर मामले में गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर जांच एजेंसी को अदालत में अपनी चार्जशीट पेश करनी होती है। सबरीमाला गोल्ड चोरी केस में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी पिछले तीन महीनों से जेल में बंद थे। हालांकि, केरल उच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) इस अवधि में अपनी जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। कानून के इसी तकनीकी आधार का लाभ उठाते हुए आरोपी के वकीलों ने जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

रक्षक बना भक्षक: रेनोवेशन के नाम पर स्वर्ण चोरी का आरोप

उन्नीकृष्णन पोट्टी पर आरोप है कि उन्होंने सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह और अन्य हिस्सों के नवीनीकरण (Renovation) के दौरान मंदिर के पवित्र सोने की चोरी की। मंदिर के आभूषणों और स्वर्ण पत्रों की मरम्मत के बहाने की गई इस हेराफेरी ने पूरे देश के हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया था। शुरुआती जांच में यह सामने आया था कि मंदिर के भंडारगृह से बड़ी मात्रा में सोना गायब है, जिसके बाद पोट्टी की संलिप्तता के प्रमाण मिलने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

केरल हाई कोर्ट की एसआईटी पर टिकी थीं उम्मीदें

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केरल उच्च न्यायालय ने खुद संज्ञान लिया था और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। कोर्ट का स्पष्ट निर्देश था कि इस मामले की तह तक जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाए। लेकिन 90 दिन बीत जाने के बाद भी ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट पेश न कर पाना एसआईटी की सुस्त कार्रवाई की ओर इशारा करता है। इस विफलता के कारण मुख्य आरोपी का जेल से बाहर आना जांच प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

मंदिर प्रशासन और सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

सबरीमाला जैसे अति-सुरक्षित और आस्था के केंद्र वाले मंदिर से सोने की चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध को दर्शाता है। यह मामला केवल वित्तीय चोरी का नहीं, बल्कि लाखों भक्तों के विश्वास के साथ खिलवाड़ का भी है। मुख्य आरोपी को जमानत मिलने के बाद मंदिर बचाओ समितियों और भक्त संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यदि प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ सकती है।

आगे की राह: क्या जांच एजेंसी फिर से करेगी गिरफ्तारी?

उन्नीकृष्णन पोट्टी को जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि वे निर्दोष साबित हो गए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि एसआईटी जैसे ही चार्जशीट दाखिल करेगी, अदालती कार्यवाही नए सिरे से शुरू होगी। हालांकि, जमानत मिलने के कारण अब वे बाहर रहकर अपना बचाव कर सकेंगे। अब सबकी नजरें केरल हाई कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या वह एसआईटी को जांच तेज करने के लिए नए निर्देश जारी करता है या इस लापरवाही के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करता है।

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