S-400 Missile Deal 2026: रक्षा मंत्रालय ने एस-400 मिसाइलों की खरीद को दी मंजूरी, ₹10,000 करोड़ का सौदा

भारतीय वायु सेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में DAC ने रूस के साथ ₹10,000 करोड़ के मिसाइल सौदे को हरी झंडी दे दी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तानी विमानों को धूल चटाने वाली इन मिसाइलों का अब नया और बड़ा जखीरा भारत आ रहा है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

S-400 Missile Deal 2026:  रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को मंजूरी दी। इनमें एक अहम निर्णय रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 288 मिसाइलों की खरीद का था। इन मिसाइलों की खरीद की लागत लगभग ₹10,000 करोड़ बताई जा रही है। यह कदम भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मिसाइलों का प्रकार और संख्या

भारतीय सेना की योजना है कि एस-400 सिस्टम के जखीरे में और अधिक लंबी और छोटी दूरी की मिसाइलें शामिल की जाएं, ताकि किसी भी प्रकार के संभावित खतरे का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके। सरकार ने गुरुवार को 120 शॉर्ट रेंज और 168 लॉन्ग रेंज मिसाइलों की खरीद की मंजूरी दी है। यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जाएगी, जिससे मिसाइलों की कमी को जल्दी से पूरा किया जा सके।

एस-400 की तैनाती: बढ़ेगा वायु सुरक्षा स्तर

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब भारत को इस वर्ष जून और नवंबर में रूस से एस-400 के दो और स्क्वाड्रन मिलेंगे। इसके साथ ही, भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। एस-400 की इन नई मिसाइलों की खरीद से इस सिस्टम की मारक क्षमता में भी वृद्धि होगी, जो देश के सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाएगी।

रक्षा मंत्री ने दी अन्य रक्षा सौदों की भी मंजूरी

गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रक्षा मंत्री ने कुल ₹3.60 लाख करोड़ के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए बहु-भूमिका लड़ाकू विमानों (MRFA) की खरीद, Dassault Rafale लड़ाकू विमानों की संख्या में बढ़ोतरी, वायु-जहाज आधारित उच्च ऊंचाई वाले छद्म-उपग्रह (High Altitude Pseudo-Satellite) की खरीद जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इन सभी सौदों के तहत भारतीय वायु सेना की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

आईएएफ के लिए लड़ाकू विमानों का महत्व

रक्षा मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया कि MRFA की खरीद से भारतीय वायु सेना को हवाई वर्चस्व में मजबूती मिलेगी, जिससे संघर्ष के सभी आयामों में भारतीय सेना की ताकत और अधिक बढ़ेगी। बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन लड़ाकू विमानों के साथ जमीनी हमलों की क्षमता को और सशक्त किया जाएगा। इसके अलावा, अधिकांश एमआरएफए मिसाइलों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

एस-400 की क्षमता का परिचय ऑपरेशन सिंदूर से हुआ

पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 सिस्टम की प्रभावशीलता दुनिया के सामने आई थी। इस ऑपरेशन में एस-400 ने पाकिस्तानी विमानों और उनके ठिकानों को निशाना बनाने के लिए कई मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद से एस-400 मिसाइलों का स्टॉक काफी हद तक कम हो गया था, और इस कमी को पूरा करने के लिए नए सौदे को मंजूरी दी गई है।रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 सिस्टम से दागी गई मिसाइलों की संख्या काफी थी, जिससे मिसाइलों का भंडार घट गया। अब भारत ने नए सौदे के जरिए इस कमी को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, ताकि एस-400 सिस्टम की मारक क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

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