Russian Oil Import: अमेरिका द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने के प्रस्तावित कानून ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस प्रस्तावित बिल की जद में भारत और चीन जैसे प्रमुख देश भी आ सकते हैं, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल आयात कर रहे हैं। भारत ने शुक्रवार (17 जुलाई) को इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
Mexico Earthquake: मैक्सिको में विनाशकारी भूकंप, सुनामी के खतरे ने बढ़ाई चिंता
क्या है अमेरिकी सीनेट का प्रस्तावित बिल?
यह प्रस्तावित कानून डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल और रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए मॉस्को को मिलने वाली वित्तीय मदद को रोका जा सके। सीनेटरों के अनुसार, यह कानून रूस से तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों—भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—को निशाना बनाएगा। इन देशों द्वारा खरीदे जाने वाले रूसी तेल पर 100 फीसदी तक भारी शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है, ताकि रूस की आमदनी को सीमित किया जा सके।
तेल नीति हमारे हितों पर आधारित
इस प्रस्तावित बिल के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें इस प्रस्तावित कानून की जानकारी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की तेल खरीद नीति पूरी तरह से उसके राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। जायसवाल ने कहा, “जहां तक तेल खरीदने की बात है, हम दुनिया के कई देशों से तेल खरीदते हैं। यह हमारे नजरिए और हमारी जरूरतों पर निर्भर करता है।” भारत का रुख साफ है कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए स्वतंत्र है।
अमेरिकी वीजा नीतियों पर भी सख्त रुख
रूसी तेल के मुद्दे के साथ-साथ, भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी वीजा नियमों में हालिया बदलावों और उनसे भारतीय नागरिकों को होने वाली परेशानियों पर भी अपनी चिंता जताई। अमेरिका ने विदेशी छात्रों, पेशेवरों और पत्रकारों के लिए वीजा नियमों को काफी सख्त कर दिया है, जिससे बड़ी संख्या में भारतीयों के प्रभावित होने की आशंका है।
प्रवक्ता ने कहा कि वीजा नीतियां और आव्रजन नियम किसी भी देश का संप्रभु अधिकार हैं। हालांकि, भारत सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि इन बदलावों से भारतीय छात्रों और वैध यात्रियों को अनावश्यक कठिनाई न हो। उन्होंने कहा, “जब भी इस तरह की समस्याएं हमारे संज्ञान में आती हैं, हम अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क करते हैं ताकि अपने नागरिकों की परेशानियों को कम किया जा सके।”
यह स्पष्ट है कि भारत एक ओर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला रख रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह प्रस्तावित बिल सीनेट में पारित होता है और यदि होता है, तो भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संबंध इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
India Russia Oil Deal: रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की सख्ती, 100 फीसदी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत की नजर










