Russia Ukraine War : रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे भीषण हमला, 666 मिसाइलों और ड्रोनों से दहला यूक्रेन, मची भारी तबाही

25 अप्रैल 2026 की रात यूक्रेन के इतिहास की सबसे खौफनाक रात बन गई। रूस ने एक साथ 666 मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोलकर नीप्रो, कीव और ओडेसा को खंडहर बना दिया। क्या पश्चिमी देशों की मदद के बावजूद यूक्रेन इस महाविनाश को रोक पाएगा या यह युद्ध के अंत की शुरुआत है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 25, 2026

Russia Ukraine War  : रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब अपने सबसे विनाशकारी और निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। रूसी सेना ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को पूरी तरह तबाह करने के इरादे से अब तक का सबसे विशाल हवाई हमला किया है। 24 और 25 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात हुए इस हमले ने न केवल यूक्रेन के कई शहरों में तबाही मचाई है, बल्कि पूरी दुनिया को रूसी सैन्य रणनीति के नए और खतरनाक रूप से परिचित कराया है।

आधी रात का तांडव: 666 हवाई हमलों से दहला आसमान

यूक्रेनी वायुसेना की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने इस हमले को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। हमले की शुरुआत 24 अप्रैल की शाम 6 बजे से हुई, जो अगली सुबह तक जारी रही। इस ऑपरेशन में रूस ने कुल 666 हवाई हमले दर्ज किए, जिनमें 47 घातक मिसाइलें और रिकॉर्ड 619 ड्रोन शामिल थे। यह हमला ‘मल्टी-डायमेंशनल’ था, जिसे जमीन, समुद्र और हवा—तीनों मोर्चों से एक साथ शुरू किया गया, जिससे यूक्रेन के रक्षा तंत्र को संभलने का मौका न मिल सके।

कामिकाजे ड्रोनों का कहर: रूसी सेना की नई रणनीति

इस हमले की सबसे बड़ी विशेषता ईरानी ‘शाहेद’ जैसे कामिकाजे ड्रोनों का बड़े पैमाने पर उपयोग रहा। ये ड्रोन अपने लक्ष्य पर जाकर सीधे टकराते हैं और एक आत्मघाती विस्फोट करते हैं। भारी संख्या में इन ड्रोनों को एक साथ दागकर रूस ने यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम को ‘ओवरलोड’ करने की कोशिश की। इस रणनीति ने यूक्रेन के सामने एक अभूतपूर्व सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में छोटे ड्रोनों को ट्रैक करना और मार गिराना बेहद जटिल होता जा रहा है।

मिसाइलों की वर्षा: इस्कंदर और कैलिबर का घातक संगम

ड्रोन के साथ-साथ रूस ने अपनी सबसे शक्तिशाली मिसाइलों का भी प्रयोग किया। इस हमले में 12 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं, जिनमें इस्कंदर-एम और एस-400 जैसी घातक प्रणालियाँ थीं। इसके अलावा, रूसी बमवर्षक विमानों और युद्धपोतों से 29 केएच-101 (KH-101) क्रूज मिसाइलें और 5 कैलिबर मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों को कैस्पियन सागर, क्रीमिया और रूस के मिलेरोवो व कुर्स्क क्षेत्रों से अलग-अलग समय पर दागा गया ताकि वे एक ही समय में यूक्रेनी ठिकानों पर प्रहार कर सकें।

यूक्रेन का पलटवार: एयर डिफेंस की अग्निपरीक्षा

भीषण हमले के बावजूद, यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम ने कड़ा मुकाबला किया। यूक्रेनी सेना का दावा है कि उन्होंने कुल 610 हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इसमें 30 मिसाइलें और लगभग 580 कामिकाजे ड्रोन शामिल थे। विशेष रूप से 26 केएच-101 और 4 कैलिबर मिसाइलों को आसमान में ही मार गिराकर यूक्रेन ने अपनी राजधानी कीव और अन्य बड़े शहरों को बड़ी तबाही से बचा लिया।

तबाही के निशान: 23 महत्वपूर्ण स्थानों पर भारी नुकसान

सफल इंटरसेप्शन के बाद भी, रूस की 13 मिसाइलें और 36 ड्रोन सुरक्षा घेरे को भेदकर अपने तय लक्ष्यों तक पहुँचने में कामयाब रहे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन के 23 महत्वपूर्ण ठिकानों पर भीषण आग और बर्बादी की खबरें हैं। इसके अलावा, मार गिराए गए ड्रोनों और मिसाइलों का मलबा 9 अलग-अलग रिहायशी इलाकों में गिरा, जिससे स्थानीय संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को काफी क्षति पहुँची है।

 वैश्विक शांति पर मंडराता खतरा

रूस का यह ‘ऑल-आउट’ हवाई हमला यह स्पष्ट करता है कि वह इस युद्ध को जल्द से जल्द अपने पक्ष में समाप्त करना चाहता है। जमीन, समुद्र और हवा से किए गए इस समन्वित प्रहार ने न केवल यूक्रेन की बिजली और संचार व्यवस्था को चोट पहुँचाई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तनाव को भी चरम पर पहुँचा दिया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह युद्ध आने वाले दिनों में और अधिक हिंसक रूप ले सकता है।

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