Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये पर पिछले कुछ समय से लगातार दबाव बना हुआ है, लेकिन मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को मुद्रा बाजार से राहत भरी खबर सामने आई। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन रुपया एक पैसे की मामूली बढ़त के साथ 90.73 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित महत्वपूर्ण व्यापारिक सौदे (Trade Deal) के अंतिम चरण में होने की खबरों और वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों के बीच रुपये में यह स्थिरता देखी गई। हालांकि यह बढ़त बहुत छोटी है, लेकिन लगातार हो रही गिरावट के दौर में इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बाजार की चाल: डॉलर की मजबूती बनाम कच्चे तेल की नरमी
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में मंगलवार सुबह रुपये की शुरुआत 90.72 पर हुई थी, जो बाद में मामूली उतार-चढ़ाव के साथ 90.73 पर स्थिर हो गया। ज्ञात हो कि सोमवार को रुपया आठ पैसे की कमजोरी के साथ 90.74 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब बंद हुआ था। रुपये को सहारा देने में सबसे बड़ी भूमिका अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में आई गिरावट ने निभाई। कच्चे तेल के दाम 0.47% गिरकर 68.33 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए, जिससे भारत के आयात बिल में कमी आने की उम्मीद जगी है और घरेलू मुद्रा को बल मिला है।
डॉलर इंडेक्स की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार का दबाव
एक तरफ जहां कच्चे तेल ने रुपये को सहारा दिया, वहीं दूसरी ओर मजबूत अमेरिकी डॉलर और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने रुपये की उड़ान को सीमित रखा। दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.23% बढ़कर 97.14 के स्तर पर पहुँच गया। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजार में भी आज भारी गिरावट देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 245 अंकों से अधिक गिरकर 83,031 पर और एनएसई निफ्टी 106 अंक फिसलकर 25,576 पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों ने सोमवार को बाजार से 972.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिसने बाजार की भावनाओं पर नकारात्मक असर डाला।
विशेषज्ञों की राय: क्या कहते हैं बाजार के दिग्गज?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपया फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार करेगा। ‘LKP सिक्योरिटीज’ के उपाध्यक्ष जतिन त्रिवेदी के अनुसार, निवेशक वर्तमान में ‘रुको और देखो’ की नीति अपना रहे हैं। शेयर बाजार में शुरुआती गिरावट के बाद आई हल्की रिकवरी ने रुपये को टूटने से बचाया है। वहीं, ‘मीरा एसेट शेयरखान’ के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने संकेत दिया है कि इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के जीडीपी (GDP) आंकड़े और आवास बाजार के डेटा रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार, आने वाले दिनों में डॉलर-रुपया स्पॉट रेट 90.30 से 90.90 के दायरे में घूम सकता है।
आगे की राह और रणनीतिक संकेत
कुल मिलाकर, भारतीय रुपया इस समय दो विरोधी ताकतों के बीच फंसा हुआ है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की नरमी भारत के लिए वरदान साबित हो रही है, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण डॉलर का मजबूत होना चिंता का विषय है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के नतीजे और घरेलू बाजार में विदेशी निवेश की वापसी ही रुपये को लंबी अवधि में मजबूती प्रदान कर सकती है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए, आयातकों और निर्यातकों को अपनी हेजिंग रणनीतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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