Bihar Politics : भारतीय जनता पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने बिहार की सियासत में एक बड़ा धमाका करते हुए अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। एक हालिया इंटरव्यू में सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का मुख्य केंद्र बिंदु बिहार होगा। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसा राजनीतिक मंच तैयार करना चाहते हैं जहाँ ‘जात-पात’ की संकीर्ण मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं होगी। आरके सिंह के अनुसार, उनकी प्राथमिकता पार्टी में केवल ईमानदार, उच्च शिक्षित और विकासोन्मुखी सोच रखने वाले लोगों को शामिल करने की है, ताकि बिहार को पारंपरिक जातिवादी राजनीति के चंगुल से बाहर निकाला जा सके।
भाजपा से विदाई और एनडीए पर तीखे प्रहार
आरा के पूर्व सांसद और पूर्व नौकरशाह आरके सिंह का भाजपा से सफर पिछले साल काफी विवादों के बाद खत्म हुआ था। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, भाजपा ने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आरके सिंह ने विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेतृत्व और उम्मीदवारों के चयन पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि टिकट वितरण में शुचिता का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे सरकार की छवि और चुनावी प्रदर्शन दोनों पर बुरा असर पड़ा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता और छवि पर सवाल
अपनी नई राजनीतिक पारी का आगाज करने से पहले आरके सिंह ने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने चौधरी की छवि और योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का चरित्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि मजबूत न हो, वह प्रदेश के विकास के लिए दूरगामी सोच नहीं रख सकता। सिंह ने तीखे लहजे में कहा कि बिहार को चलाने के लिए एक विजनरी और बेदाग नेतृत्व की जरूरत है, जिसकी वर्तमान व्यवस्था में कमी दिखाई देती है। उनके इन बयानों से बिहार की गठबंधन सरकार के भीतर भी हलचल पैदा हो गई है।
नीतीश कुमार का शासन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल पर चर्चा करते हुए आरके सिंह ने एक संतुलित लेकिन कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्वीकार किया कि नीतीश कुमार का पहला कार्यकाल बिहार की प्रगति के लिए बेहतर था। हालांकि, उन्होंने दूसरे कार्यकाल की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि उस दौरान सरकार के लगभग 99 प्रतिशत मंत्री भ्रष्टाचार में डूबे हुए थे। सिंह ने कहा कि यदि नेतृत्व खुद सीधे तौर पर भ्रष्टाचार में शामिल न भी हो, लेकिन उसके आसपास के लोग भ्रष्ट हों, तो यह नेतृत्व की सबसे बड़ी विफलता और शर्म की बात है।
‘खुलकर बोलने की मिली सजा’ और मोदी के प्रति सम्मान
आरके सिंह ने भाजपा से अपने निलंबन को सजा मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने गर्व से कहा कि वह हमेशा सत्य और सिद्धांतों के लिए खुलकर बोलते रहे हैं, और यही बेबाकी उनके निलंबन का कारण बनी। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि उनके मुखर स्वभाव के बावजूद पीएम मोदी ने उन्हें सात वर्षों तक ऊर्जा मंत्री के महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखा, जो उनके काम के प्रति प्रधानमंत्री के विश्वास को दर्शाता है। 2014 में प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए आरके सिंह अब बिहार में एक नई वैचारिक क्रांति लाने का दावा कर रहे हैं।
बिहार के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद?
आरके सिंह की नई पार्टी की घोषणा ने बिहार के सियासी समीकरणों को उलझा दिया है। एक पूर्व गृह सचिव और सफल ऊर्जा मंत्री के रूप में उनकी छवि काफी मजबूत रही है। अब देखना यह होगा कि क्या वे बिहार की जनता को ‘जाति’ के बजाय ‘नीति’ और ‘ईमानदारी’ के नाम पर एकजुट कर पाएंगे। फिलहाल, पार्टी के नाम और झंडे का खुलासा होना बाकी है, लेकिन उनके तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि वे आगामी चुनावों में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर सकते हैं।









