Reservation Row: आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने समाज में दलितों के साथ जारी भेदभाव को लेकर चिंता जताई है, लेकिन आजादी के बाद कई दशकों तक कांग्रेस की सरकार रहने के बावजूद अगर यह समस्या बनी रही तो इसकी जिम्मेदारी से कांग्रेस पूरी तरह बच नहीं सकती।
राहुल गांधी के आरक्षण वाले बयान पर चिराग पासवान का पलटवार
चिराग पासवान ने कहा कि अगर आज भी समाज में भेदभाव की स्थिति मौजूद है तो यह निश्चित रूप से सरकार के लिए भी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि दलितों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर उनकी और राहुल गांधी की चिंता एक जैसी हो सकती है, लेकिन केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाकर सामाजिक न्याय की दिशा में आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
सामाजिक न्याय की लड़ाई में नुकसान किसका होगा?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सबसे बड़ा नुकसान उसी वर्ग को हो सकता है, जो लंबे समय से सामाजिक न्याय की लड़ाई में संघर्ष करता आया है। उनके मुताबिक, यदि राजनीतिक दल इस मुद्दे को केवल एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे तो सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।
आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव है: चिराग पासवान
आरक्षण के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था का मूल आधार सामाजिक भेदभाव रहा है। उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की बहस को संविधान की मौजूदा व्यवस्था के संदर्भ में सवालों के घेरे में बताया। चिराग ने कहा कि जिन लोगों को आज दलितों की स्थिति को लेकर चिंता है, उन्हें यह भी देखना चाहिए कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश में शासन की जिम्मेदारी किन राजनीतिक दलों के पास रही।
‘हर कोई राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहता है’: चिराग पासवान
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कई राजनीतिक दल अपने-अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से संवैधानिक व्यवस्था और आरक्षण के सामाजिक आधार को लेकर अपनी बात स्पष्ट रखना चाहते हैं।
SC-ST आरक्षण और क्रीमी लेयर पर भी रखी राय
चिराग पासवान ने कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव से जुड़ा है। उन्होंने क्रीमी लेयर के प्रावधान को लेकर उठने वाले सवालों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि यदि व्यवस्था में बदलाव की बात होती है तो उसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संसद में लाया जाना चाहिए।
जीतन राम मांझी और उनके बेटे से चिराग पासवान ने मांगा इस्तीफा
आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे को लेकर चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे से इस्तीफा देने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि अगर मांझी आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर जैसे प्रावधान के पक्ष में हैं तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और उसके बाद इस व्यवस्था की वकालत करनी चाहिए।
‘पहले इस्तीफा दें, फिर क्रीमी लेयर की बात करें’
चिराग पासवान ने कहा कि जीतन राम मांझी के बेटे को भी अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनके मुताबिक, सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते हुए अगर राजनीतिक स्तर पर ही अलग-अलग वर्गों में विभाजन बढ़ाया जाएगा तो इस संघर्ष का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
दलितों के साथ भेदभाव के उदाहरण गिनाकर चिराग ने चेताया
चिराग पासवान ने कहा कि सामाजिक भेदभाव की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में बदलाव नहीं आया तो भविष्य में भी दलितों को घोड़ी चढ़ने से रोकने, बारात में शामिल होने से रोकने, मंदिर में प्रवेश से रोकने या उच्च पदों पर पहुंचने के बावजूद सामाजिक भेदभाव का सामना करने जैसी घटनाएं जारी रह सकती हैं।
आरक्षण पर बयानबाजी के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर चिराग पासवान के बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। एक तरफ राहुल गांधी दलितों के साथ भेदभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चिराग पासवान कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर पलटवार कर रहे हैं। साथ ही जीतन राम मांझी से इस्तीफे की मांग ने इस बहस को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।










