Reliance Share Crash: भयंकर गिरावट के बाद रिलायंस पर बड़ा खुलासा! अब भी निवेश करना सुरक्षित है या फंस सकते हैं आप?

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में मंगलवार को रिकॉर्ड हाई ₹1,611.80 के बाद 5% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा रूसी कच्चे तेल (Russian Crude) की खबरों के खंडन और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ चेतावनी ने बाजार में हलचल मचा दी। हालांकि, दिग्गज ब्रोकरेज हाउस अब भी रिलायंस पर बुलिश हैं और ₹1,847 तक के टारगेट देख रहे हैं।

Reliance Share Crash

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 6, 2026

Reliance Share Crash: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में मंगलवार को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सोमवार को ₹1,611.80 के अपने अब तक के उच्चतम स्तर को छूने के बाद, अगले ही दिन निवेशकों ने भारी बिकवाली की। रिलायंस का शेयर इंट्राडे में लगभग 5% तक टूटकर ₹1,496.30 के निचले स्तर पर आ गया। इस गिरावट ने न केवल निवेशकों को चौंकाया, बल्कि बेंचमार्क इंडेक्स (Nifty/Sensex) पर भी बड़ा दबाव बनाया।

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रूसी कच्चे तेल पर कंपनी की सफाई

बताते चले कि, मंगलवार को आई इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण रूसी तेल की खरीद को लेकर फैली खबरें रहीं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूस से कच्चे तेल से भरे तीन टैंकर जामनगर रिफाइनरी की ओर आ रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तुरंत इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए इन दावों को ‘पूरी तरह गलत’ बताया। कंपनी ने साफ किया कि पिछले तीन हफ्तों में उन्हें कोई रूसी क्रूड प्राप्त नहीं हुआ है और न ही जनवरी 2026 में ऐसी कोई संभावना है। इस खंडन के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू हो गई।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव

आपको बता दे कि, शेयरों पर दबाव का एक दूसरा बड़ा कारण अमेरिका से आए वैश्विक संकेत थे। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसमें उन्होंने रूसी तेल की खरीद जारी रखने वाले देशों पर भारी ‘टैरिफ’ लगाने की चेतावनी दी थी। भारत और रिलायंस जैसे बड़े खरीदारों के लिए यह एक चिंता का विषय बन गया, जिससे तेल एवं गैस क्षेत्र (O2C Segment) के शेयरों में बिकवाली का दौर चला।

वेनेजुएला फैक्टर और रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार की उम्मीद

गिरावट के बीच, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए वेनेजुएला एक सकारात्मक पहलू बना हुआ है। रिलायंस का वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA के साथ पुराना संबंध है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो रिलायंस को ब्रेंट क्रूड की तुलना में 5 से 8 डॉलर प्रति बैरल सस्ता कच्चा तेल मिल सकता है। इससे कंपनी के ‘ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन’ (GRM) में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जो भविष्य में मुनाफे को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।

टॉप ब्रोकरेज हाउसेस अब भी रिलायंस पर बुलिश

भले ही शेयर में गिरावट आई हो, लेकिन वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों का भरोसा रिलायंस पर कायम है। Morgan Stanley ने ₹1,847 के लक्ष्य के साथ ‘Overweight’ रेटिंग दी है। वहीं, UBS और Jefferies ने क्रमशः ₹1,820 और ₹1,785 के टारगेट प्राइस को बरकरार रखा है। जानकारों का मानना है कि 2026 में रिलायंस के न्यू एनर्जी, टेलीकॉम (Jio) और रिटेल वर्टिकल में वैल्यू अनलॉकिंग के कई ट्रिगर मौजूद हैं।

रिलायंस के फंडामेंटल्स और तकनीकी चार्ट पर सपोर्ट लेवल

रिलायंस का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है, जिसकी क्षमता 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी मजबूत है; Q2 FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 14% बढ़कर ₹22,092 करोड़ रहा। तकनीकी तौर पर, एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹1,540–1,550 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन है। जब तक शेयर इस स्तर के ऊपर है, लंबी अवधि का रुझान सकारात्मक बना रहेगा। ₹1,600 के ऊपर की क्लोजिंग इसे फिर से ₹1,700 की ओर ले जा सकती है।

डिस्क्लेमर:Prime TV India किसी भी स्टॉक, म्यूचुअल फंड या आईपीओ (IPO) में निवेश करने की सलाह या सुझाव नहीं देता है। यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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