RCB Champion : कप्तान रजत पाटीदार ने आगे रहकर किया कमाल, जानिए जीत के वो पांच मास्टरस्ट्रोक

RCB Champion Rajat Patidar: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने के पीछे कप्तान रजत पाटीदार का वो कौन सा सीक्रेट प्लान था? मैदान पर लिए गए वो 5 चौंकाने वाले फैसले और जादुई मास्टरस्ट्रोक, जिसने गुजरात टाइटंस के हाथों से जीत छीन ली और बेंगलुरु को बना दिया आईपीएल का सिकंदर!

RCB Champion

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 1, 2026

RCB Champion : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए गुजरात टाइटंस को शिकस्त दे दी। अहमदाबाद के खचाखच भरे नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस फाइनल मैच को जीतकर आरसीबी ने लगातार दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। इस ऐतिहासिक कारनामे के साथ ही बेंगलुरु अब चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस के बाद लीग के इतिहास में लगातार दो खिताब जीतने वाली सिर्फ तीसरी टीम बन गई है।

लगभग डेढ़ महीने तक चले इस कड़े टूर्नामेंट में बेंगलुरु की खिताबी जीत यह साफ बयां करती है कि टीम ने चैंपियन बनने के लिए खुद पर कितनी कड़ी मेहनत की है। हेड कोच एंडी फ्लावर, सहयोगी स्टाफ और प्रबंधन ने पर्दे के पीछे जो रणनीतियां बनाईं, वे मैदान पर बेहद कारगर साबित हुईं। आइए जानते हैं आरसीबी की इस धमाकेदार खिताबी जीत की 5 सबसे बड़ी वजहें।

1. आक्रामकता को बनाया टीम का नया ‘सक्सेस मंत्र’

मुख्य कोच एंडी फ्लावर की देखरेख में आरसीबी ने निर्भीक और आक्रामक क्रिकेट खेलने को अपनी सफलता का मूलमंत्र बनाया। टीम की यह आक्रामक सोच केवल बल्लेबाजी में ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी और फील्डिंग में भी साफ दिखाई दी। इस नए नजरिए को कप्तान रजत पाटीदार ने खुद आगे बढ़कर लीड किया, जिसका असर टीम के सबसे जूनियर और अनकैप्ड खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ा। आरसीबी ने जिस आक्रामक तेवर के साथ इस मेगा टूर्नामेंट में कदम रखा था, फाइनल के आखिरी ओवर तक उसे बरकरार रखा और यही निडर दृष्टिकोण टीम की खिताबी जीत का सबसे मजबूत आधार बना।

2. टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों का निरंतर और ‘विराट’ प्रदर्शन

बेंगलुरु की खिताबी सफलता की दूसरी सबसे बड़ी वजह उसके शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों का निरंतर अच्छा प्रदर्शन रहा। हालांकि, ओपनिंग में विराट कोहली का जोड़ीदार समय-समय पर बदलता रहा। पहले चैड बीव्स की फॉर्म खराब हुई, तो फिल सॉल्ट को मौका मिला और जब सॉल्ट का बल्ला शांत हुआ, तो प्रबंधन ने सही समय पर वेंकटेश अय्यर को प्रमोट किया। विराट कोहली ने 16 मैचों में 56.26 की लाजवाब औसत से 1 शतक और 5 अर्धशतक जमाकर टीम के लिए सबसे ज्यादा 675 रन बनाए। वहीं, वेंकटेश अय्यर ने भी ओपनर के तौर पर 7 मैचों में 209 रन कूट डाले। इसके अलावा देवदत्त पडिक्कल ने भी 16 मैचों में 33.14 की औसत से 464 रन बनाकर मध्यक्रम को मजबूती दी।

3. कप्तान रजत पाटीदार का आगे रहकर शानदार नेतृत्व

अगर इस सीजन में रनों के मामले में विराट कोहली टीम के सरदार रहे, तो कप्तान रजत पाटीदार आरसीबी की असली रीढ़ साबित हुए। नंबर-4 पर बल्लेबाजी करते हुए पाटीदार के तूफानी अंदाज और मैदान पर उनकी सूझबूझ भरी कप्तानी ने आरसीबी के मनोबल को कभी गिरने नहीं दिया। पाटीदार इस सीजन में 500 से अधिक रन बनाने वाले चुनिंदा कप्तानों में शामिल रहे। उन्होंने 15 मैचों में 35.78 की औसत से 501 रन बनाए, जिसमें 5 अर्धशतक शामिल थे। आंकड़ों से अलग, उनका 192.69 का विस्फोटक स्ट्राइक रेट टीम के लिए सबसे बड़ा एक्स-फैक्टर साबित हुआ, जिसने विपक्षी गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया।

4. अनुभवी भुवनेश्वर कुमार की जादुई और धारदार गेंदबाजी

क्रिकेट का यह नियम है कि बल्लेबाज आपको मैच जिता सकते हैं, लेकिन गेंदबाज आपको टूर्नामेंट जिताते हैं। अपने उम्र के 37वें पड़ाव में चल रहे भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार आरसीबी के लिए इस सीजन में ‘गोल्डन हैंड’ साबित हुए। कप्तान पाटीदार ने जब भी विकेट की तलाश में भुवी को गेंद सौंपी, उन्होंने निराश नहीं किया। यदि बल्लेबाजी में विराट ने मुख्य भूमिका निभाई, तो गेंदबाजी में भुवनेश्वर ने वही जिम्मेदारी संभाली। भुवी ने पूरे सीजन के 16 मैचों में बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 28 विकेट चटकाए और वह इस साल पर्पल कैप की रेस में दूसरे सबसे सफल गेंदबाज रहे।

5. क्रुणाल पांड्या का हरफनमौला खेल और रासिख सलाम का बेहतरीन साथ

आरसीबी को चैंपियन बनाने में ऑलराउंडर क्रुणाल पांड्या और युवा गेंदबाज रासिख सलाम का भी अमूल्य योगदान रहा। क्रुणाल पांड्या के लिए यह सीजन उनके आईपीएल करियर का सर्वश्रेष्ठ सीजन कहा जा सकता है। उन्होंने बल्लेबाजी में जरूरत के समय 226 रन जोड़े, तो वहीं गेंदबाजी में 50.3 ओवर फेंककर 14 महत्वपूर्ण विकेट भी हासिल किए। क्रुणाल टीम के सबसे किफायती (8.41 इकॉनमी रेट) गेंदबाज रहे। दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज रासिख सलाम ने भुवनेश्वर कुमार का बखूबी साथ निभाया और महज 12 मैचों में अपनी रफ्तार का जलवा दिखाते हुए 19 विकेट चटकाकर टीम को लगातार दूसरी बार चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।