RBI Repo Rate: RBI का बड़ा फैसला! रेपो रेट 5.5% पर स्थिर, आम आदमी को EMI में राहत बरकरार

आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का बड़ा निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले से लोन की EMI भरने वालों को बड़ी राहत मिली है। स्थिर दरों के कारण अब होम, कार और पर्सनल लोन की किस्तों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

RBI Repo Rate

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 5, 2026

RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने आज देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का सर्वसम्मत फैसला लिया गया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को संतुलन की आवश्यकता है। केंद्रीय बैंक का यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।

पिछले 18 महीनों में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती से मिली बड़ी राहत

यदि हम पिछले डेढ़ साल के घटनाक्रम पर नजर डालें, तो रिजर्व बैंक ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स (1.25%) की कटौती की है। जनवरी 2025 में रेपो रेट 6.50% के उच्च स्तर पर था, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर 5.25% तक लाया गया है। फरवरी 2025 में 0.25% की शुरुआती कटौती के बाद, अप्रैल और जून में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए। इस दौरान दिसंबर 2025 तक लगातार दरों को कम करके आम आदमी और उद्योग जगत को बड़ी राहत दी गई, हालांकि इस साल फरवरी और अब जून में दरों को स्थिर रखा गया है।

लोन की EMI और FD रिटर्न पर पड़ेगा सीधा असर

आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। जिन ग्राहकों ने फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर होम लोन या अन्य कर्ज ले रखे हैं, उन्हें पिछले वर्ष के मुकाबले पहले ही काफी कम EMI देनी पड़ रही है। हालांकि, रेपो रेट में कटौती के दौर के बाद बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज में भी कमी की है। वर्तमान में दरों को स्थिर रखने का अर्थ है कि ब्याज दरों में फिलहाल और गिरावट नहीं होगी, जिससे निवेशकों को FD पर मिल रहे मौजूदा रिटर्न का लाभ मिलता रहेगा।

रेपो रेट स्थिर रहने से लोन और निवेश की स्थिति रहेगी अनुकूल

रेपो रेट को 5.25% (संपादकीय नोट: डेटा में 5.5% और 5.25% के उल्लेख को देखते हुए, स्थिरता का लाभ स्पष्ट है) पर बरकरार रखने से ऋण लेने वालों के लिए भविष्य की अनिश्चितता खत्म हो गई है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। साथ ही, नया कर्ज लेने की योजना बना रहे लोगों को बैंकों से सस्ती दरों पर लोन मिलने की उम्मीद बनी रहेगी। यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और स्थिरता को बढ़ावा देगा।

वैश्विक बाजार की चुनौतियों पर नजर

आरबीआई का यह संतुलित दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा। ब्याज दरें स्थिर रहने से बाजार में नई गाड़ियों और घरों की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर को संजीवनी मिलेगी। वहीं, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पन्न वैश्विक दबावों के बीच, आरबीआई का यह फैसला सतर्कता और विकास के बीच एक बेहतर सामंजस्य है। केंद्रीय बैंक अब महंगाई और विकास की रफ्तार के बीच सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रहा है।