West Bengal Assembly Election Results: पानीहाटी सीट पर भाजपा की बड़ी जीत, आरजी कर पीड़िता की मां ने टीएमसी को हराया

West Bengal Assembly Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट पर एक ऐसी कहानी लिखी है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भाजपा प्रत्याशी रत्ना देबनाथ ने भारी मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा में अपनी जगह पक्की कर ली है। रत्ना कोई साधारण राजनेता नहीं, बल्कि अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई वीभत्स घटना का शिकार हुई जूनियर डॉक्टर की मां हैं। यह जीत एक राजनीतिक दल की जीत से कहीं बढ़कर, व्यवस्था के खिलाफ एक मां के संघर्ष की परिणति मानी जा

West Bengal Assembly Election Results

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 5, 2026

West Bengal Assembly Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट पर एक ऐसी कहानी लिखी है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भाजपा प्रत्याशी रत्ना देबनाथ ने भारी मतों से जीत दर्ज कर विधानसभा में अपनी जगह पक्की कर ली है। रत्ना कोई साधारण राजनेता नहीं, बल्कि अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई वीभत्स घटना का शिकार हुई जूनियर डॉक्टर की मां हैं। यह जीत एक राजनीतिक दल की जीत से कहीं बढ़कर, व्यवस्था के खिलाफ एक मां के संघर्ष की परिणति मानी जा रही है।

मजबूत राजनीतिक गढ़ में सेंधमारी

बताते चले कि, चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रत्ना देबनाथ को कुल 87,977 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत प्रत्याशी तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया। पानीहाटी सीट लंबे समय से टीएमसी का गढ़ रही है, जहाँ से तीर्थंकर के पिता निर्मल घोष लगातार पांच बार विधायक रहे थे। लेकिन 4 मई को घोषित परिणामों ने यह साफ कर दिया कि जनता ने सत्ता के रसूख के बजाय न्याय की मांग कर रही एक पीड़ित माँ के पक्ष में अपना निर्णायक जनादेश (Public Mandate) दिया है।

बेटी के इंसाफ के लिए चुनावी समर में उतरी रत्ना

आपको बता दे कि, रत्ना देबनाथ का चुनावी मैदान में उतरना महज एक इत्तेफाक नहीं था। अगस्त 2024 में आरजी कर अस्पताल में उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने बंगाल ही नहीं, बल्कि देश की आत्मा को झकझोर दिया था। लगभग 20 महीनों तक सड़कों पर इंसाफ की लड़ाई (Fight for Justice) लड़ने के बाद उन्होंने इस व्यवस्था का हिस्सा बनकर बदलाव लाने का निर्णय लिया। प्रचार के दौरान उन्होंने बार-बार दोहराया कि उनका यह संघर्ष केवल उनकी अपनी बेटी के लिए नहीं, बल्कि राज्य की उन तमाम बेटियों के लिए है जो असुरक्षित माहौल और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हुई हैं।

चुनावी अभियान में दिखा एक मां का दर्द

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में रत्ना देबनाथ का एक वीडियो वायरल होने पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। इस वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ तीखे शब्दों का प्रयोग किया था, जिसे टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने आचार संहिता का उल्लंघन (Violation of Code of Conduct) बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, रत्ना के समर्थकों और स्थानीय जनता ने इसे ‘अपमान’ के बजाय एक मां का ‘आक्रोश’ माना। समर्थकों का तर्क था कि जिस माँ ने अपनी संतान को खोया है, उसका यह उबाल स्वाभाविक है, जो सीधे तौर पर सत्ता की संवेदनहीनता को चुनौती दे रहा था।

प्रतीकात्मक विरोध का नया चेहरा

रत्ना देबनाथ ने अपने प्रचार अभियान को बहुत ही कलात्मक और प्रतीकात्मक तरीके से पेश किया। वे अक्सर ऐसी साड़ी पहनकर जनता के बीच जाती थीं, जिस पर “मेरुदंड बिक्री नेई” (रीढ़ बिकाऊ नहीं है) लिखा होता था। यह सीधा हमला टीएमसी शासन और पुलिस प्रशासन पर था, जिसे भाजपा लगातार ‘सत्ता के आगे नतमस्तक’ बता रही थी। नामांकन के दिन स्मृति ईरानी की मौजूदगी ने इस महिला सुरक्षा (Women Safety) के मुद्दे को राष्ट्रीय फलक पर खड़ा कर दिया। भाजपा ने उन्हें बंगाल की हर पीड़ित महिला के प्रतिनिधि के तौर पर पेश किया, जिसका असर मतदान के दिन साफ तौर पर देखने को मिला।

पानीहाटी की जनता ने व्यवस्था के विरुद्ध दिया फैसला

रत्ना देबनाथ ने अपने पूरे अभियान को ‘न्यायिक जवाबदेही’ और ‘महिलाओं की मर्यादा’ के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा। इससे चुनाव महज एक दलीय मुकाबला न रहकर एक नैतिक और भावनात्मक जनआंदोलन (Emotional and Moral Movement) बन गया। पानीहाटी की जनता ने रत्ना की पीड़ा को न केवल समझा, बल्कि उसे वोट की ताकत में बदलकर व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया। नागरिक समाज की मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बावजूद, चुनाव परिणाम इस बात के गवाह हैं कि बंगाल की जनता अब वास्तविक सुरक्षा और व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में बढ़ चुकी है।