LPG Crisis: रांची में गहराया ईंधन और LPG संकट! सांसद महुआ माजी ने केंद्र की विदेश नीति पर उठाए सवाल

झारखंड की राजधानी रांची में ईंधन और LPG की भारी कमी के बीच JMM सांसद महुआ माजी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। पश्चिम एशिया संकट के चलते बढ़ती किल्लत को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने और 25 दिनों की इंटर-बुकिंग अवधि लागू करने का निर्देश दिया है।

mahua maji

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 10, 2026

LPG Crisis: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने मंगलवार को रांची में ईंधन और रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया कि शहर के पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे आम जनता में भविष्य को लेकर असुरक्षा का भाव है। माजी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता पैदा हुई है, जिसे देखते हुए भारत सरकार को अपनी विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए।

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पेट्रोलियम मंत्रालय का कड़ा कदम

बताते चले कि, ईंधन की कमी और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों को देखते हुए, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सक्रियता दिखाई है। मंत्रालय ने देश की तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG के उत्पादन में तेजी लाएं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर केवल घरेलू उपयोग के लिए किया जाएगा। भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई बाधाओं के बीच नागरिकों को राहत देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम

बाजार में ईंधन की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण निवारक उपाय किया है। मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों की ‘इंटर-बुकिंग अवधि’ अनिवार्य होगी। इसका अर्थ है कि एक सिलेंडर बुक करने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिनों से पहले बुक नहीं किया जा सकेगा। मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य स्टॉक की जमाखोरी पर लगाम लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक घर को समान रूप से रसोई गैस उपलब्ध हो सके।

संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर महुआ माजी का स्पष्टीकरण

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव के टलने पर महुआ माजी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 9 मार्च को प्रस्तावित इस प्रस्ताव को पेश न करने का कारण तेजी से बदलता राजनीतिक घटनाक्रम था। विपक्ष ने मुख्य रूप से पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत चर्चा की मांग की थी। चूंकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सदन में पहले ही बयान दे दिया था, इसलिए विपक्षी रणनीति में बदलाव किया गया।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक

संसद के भीतर माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब सरकार ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी, लेकिन संख्याबल की कमी और विपक्षी नारों के कारण सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा। पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने प्रदर्शनकारी सांसदों को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि सरकार ने वैश्विक संकट और उसके भारत पर प्रभाव को लेकर विस्तृत जवाब दे दिया है, फिर भी विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा।

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