Rambhadracharya News: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में प्रख्यात कथावाचक और जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ को लेकर एक बेहद बड़ा और तीखा बयान दिया है। अकराबाद थाना क्षेत्र के लधौआ चीनी मिल परिसर में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव में पहुंचे रामभद्राचार्य ने वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस समय हमारा देश दो प्रकार की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौतियों और साजिशों से जूझ रहा है। जगद्गुरु ने देश की बहन-बेटियों को विशेष रूप से सावधान और सजग रहने की चेतावनी दी है, जिसके बाद से ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
लव जिहाद की भयावह घटनाओं पर जताई चिंता
बताते चले कि, कथा के मंच से लव जिहाद (Love Jihad Case) के खतरों पर बोलते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने देश में हाल ही में घटित हुई कुछ खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदातों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज ऐसी घिनौनी घटनाएं सामने आ रही हैं जिनमें युवतियों को पहले प्रेम संबंधों के जाल में फंसाकर धोखा दिया जाता है, और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर शवों के टुकड़े-टुकड़े करके फ्रिज में छिपा दिए जाते हैं। उन्होंने सनातन समाज और अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि परिवारों को अपनी संतानों, विशेषकर बेटियों के प्रति वैचारिक रूप से जागरूक और सुरक्षा के प्रति सजग होना पड़ेगा ताकि कोई भी मासूम किसी छल या छलावे का शिकार न बने।
कोर्ट में दी गई गवाही को किया याद
धार्मिक मुद्दों पर चर्चा करते हुए रामभद्राचार्य ने अयोध्या में निर्मित भव्य प्रभु श्री राम के मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) का गौरवगान किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह पावन स्थल करोड़ों रामभक्तों की अटूट आस्था, सदियों के बलिदान और लंबे विधिक संघर्ष का जीवंत परिणाम है। जगद्गुरु ने न्यायपालिका में चले लंबे कानूनी विवाद को याद करते हुए बताया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के समक्ष उनके द्वारा दी गई प्राचीन शास्त्रों की गवाही इस मामले में पूरी तरह निर्णायक और टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी, जिससे आज रामलला अपने भव्य महल में विराजमान हैं।
मथुरा, काशी और संभल पर बड़ा संकल्प
अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद जगद्गुरु ने अब हिंदू समाज की अगली धार्मिक अपेक्षाओं और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Mathura Krishna Janmabhoomi), काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी और संभल के ऐतिहासिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करने का समय आ गया है। इस दौरान उन्होंने मंच से अपना एक बेहद कठोर व्यक्तिगत संकल्प दोहराया। रामभद्राचार्य ने कहा कि जब तक मथुरा में भगवान कृष्ण की मूल जन्मभूमि का मुद्दा पूरी तरह सुलझ नहीं जाता, तब तक वह पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के किसी भी मंदिर में जाकर उनके विग्रह के दर्शन नहीं करेंगे। उनके इस दृढ़ संकल्प पर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाकर अपनी सहमति जताई।
अलीगढ़ का नाम बदलने की पुरजोर मांग
कथावाचक ने अपने उद्बोधन के अंत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक जिले के नामकरण पर भी बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने मांग उठाई कि अलीगढ़ का नाम तत्काल बदलकर ‘हरिगढ़’ (Harigarh Name Change) किया जाना चाहिए, क्योंकि यह संपूर्ण क्षेत्र प्राचीन काल से ही सनातन परंपरा, धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्र निर्माण में सनातन संस्कृति की भूमिका को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि समाज को बिखरने से बचाने के लिए हमें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के संस्कारों, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक आदर्शों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारना ही होगा।










