Ramadan 2026: रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना है, जिसे आत्म-संयम, इबादत, सब्र और दान का महीना माना जाता है। इस वर्ष रमजान 17 या 18 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस महीने में मुसलमान रोज़ा रखते हैं, नमाज़ अदा करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। साथ ही, रमजान का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी महीने पवित्र कुरान का अवतरण हुआ था। आइए जानते हैं कि इस पाक महीने में किन बातों का पालन करना चाहिए और किनसे बचना चाहिए।
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रमजान में क्या करें?

रोज़ा पूरी नीयत और ईमानदारी से रखें
रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि बुरे विचारों और गलत कर्मों से दूर रहने का संकल्प है।
पांच वक्त की नमाज़ और तरावीह पढ़ें
रमजान में नियमित नमाज़ के साथ रात की विशेष नमाज़ तरावीह का महत्व बहुत अधिक है।
क़ुरान की तिलावत करें
इस महीने में कुरान पढ़ने और समझने का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
ज़कात और सदका दें
जरूरतमंदों की मदद करना रमजान की सबसे बड़ी नेकी है। ज़कात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है।
इफ्तार में सादगी रखें
रोज़ा खोलते समय खजूर और पानी से इफ्तार करना सुन्नत माना जाता है।
शब-ए-कद्र की इबादत करें
रमजान की आखिरी 10 रातों में से एक रात लैलतुल कद्र मानी जाती है, जो हजार महीनों से बेहतर बताई गई है।
रमजान में क्या न करें?
झूठ, चुगली और गाली-गलौज से बचें
रोज़ा केवल पेट का नहीं, बल्कि जुबान और व्यवहार का भी होता है।
गुस्सा और झगड़े से दूर रहें
रमजान सब्र और शांति का महीना है।
फिजूलखर्ची न करें
इफ्तार पार्टियों में अनावश्यक खर्च और भोजन की बर्बादी से बचें।
बुरी आदतों से दूरी बनाए रखें
धूम्रपान, शराब और अन्य गलत गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहें।
सेहत की अनदेखी न करें
सहरी और इफ्तार में संतुलित भोजन लें और पर्याप्त पानी पिएं।
रमजान में खास टिप्स

सहरी कभी न छोड़ें
इफ्तार में तला-भुना कम खाएं
रात में पर्याप्त नींद लें
जरूरतमंदों की मदद करें
रमजान का महीना आत्मिक शुद्धि, सब्र और अल्लाह की इबादत का समय है। इस दौरान रोज़ा केवल भूख-प्यास से बचने का नाम नहीं, बल्कि आत्म-संयम और नेक कार्यों का अभ्यास है। अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं और गलत आदतों से बचते हैं, तो रमजान आपके जीवन में बरकत और सुकून लेकर आएगा।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









