Ramadan 2026: माह-ए-रमजान का आगाज़ हो चुका है। पिछले कई दिनों से घरों और मस्जिदों में जिस पवित्र महीने की तैयारियां चल रही थीं, वह अब पूरी रौनक के साथ शुरू हो गया है। चारों ओर इबादत, तिलावत और रूहानी माहौल देखने को मिल रहा है। सहरी और इफ्तार की रौनक के साथ लोग अल्लाह की बंदगी में मशगूल हैं।
Ramadan 2026: रमजान के महीने में किन बातों का रखें ध्यान? जानें जरूरी नियम
सहरी से तरावीह तक इबादत का सिलसिला
गुरुवार तड़के लोगों ने सहरी की और तहज्जुद के बाद फज्र की नमाज अदा की। कुरआन-ए-पाक की तिलावत, तस्बीह और दुआओं के साथ दिन की शुरुआत हुई। मस्जिदों में दरूदो सलाम पढ़ा गया और नमाजियों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।
दोपहर की जोहर नमाज के बाद बाजारों में इफ्तार की खरीदारी के लिए चहल-पहल बढ़ गई। घरों में इफ्तार के पकवान तैयार किए गए। असर की नमाज के बाद मस्जिदों में जरूरतमंदों और मुसाफिरों के लिए इफ्तार भेजी गई। शाम को सभी ने मिलकर दस्तरख्वान पर इफ्तार किया। खजूर, फल, पकोड़ी और चना जैसे व्यंजनों ने दिनभर की भूख-प्यास दूर कर दी।
इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज अदा की गई और रात में इशा, तरावीह, वित्र व नफ्ल नमाज का दौर चला। यह सिलसिला पूरे महीने जारी रहेगा। शहर के बाजारों में सेवइयां, खजूर और सहरी-इफ्तार के सामान की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
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रमजान के तीन अशरे और उनकी अहमियत

रमजान के 30 दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है—पहला रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नम से निजात का। इस समय पहला अशरा चल रहा है, जिसमें लोग अल्लाह की रहमत पाने की दुआ कर रहे हैं। इस महीने में नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
रोजा: रूहानी और जिस्मानी फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजा रखने के कई लाभ हैं। यह न केवल इंसान को सब्र और आत्म-संयम सिखाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। रोजा रखने से पाचन तंत्र बेहतर होता है, शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और वजन नियंत्रित रहता है। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि रोजा इंसान को भूख-प्यास का एहसास कराता है, जिससे जरूरतमंदों के प्रति हमदर्दी बढ़ती है। यह इबादत इंसान को अपनी इच्छाओं पर काबू पाना और परहेजगारी सीखने का मौका देती है।
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जरूरतमंदों की मदद का पैगाम
उलमा और इमामों ने अपील की है कि रमजान के महीने में दान-पुण्य, जकात और सदका अधिक से अधिक करें। गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने की खास जिम्मेदारी है। रमजान को बरकत, रहमत और मगफिरत का महीना बताया गया है, जिसमें अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुले रहते हैं। इस महीने में इबादत के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और दूसरों की मदद करने का खास महत्व है।









