Ram Mandir Donation Case: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित दान चोरी और जमीन खरीद घोटाले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच तेज कर दी है। पिछले दो दिनों तक एसआईटी के अधिकारियों ने अयोध्या में डेरा डालकर गहन छानबीन की, जिससे राम नगरी का माहौल गरमाया हुआ है।
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एसआईटी की सक्रियता और जांच का दायरा
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी जांच के पहले दिन ट्रस्ट के अनिल मिश्रा और गोपाल राव से लंबी पूछताछ की। इस दौरान टीम ने मंदिर निर्माण से संबंधित जमीन की खरीद-फरोख्त का विस्तृत ब्यौरा खंगाला और मामले से जुड़े गवाहों की जानकारी भी जुटाई। दूसरे दिन भी एसआईटी के अधिकारी लगभग 6 घंटे तक मंदिर परिसर में मौजूद रहे। जांच पूरी करने के बाद टीम सरयू गेस्ट हाउस से लखनऊ के लिए रवाना हो गई। प्रशासनिक स्तर पर चल रही यह जांच अब निर्णायक मोड़ पर है।
संत धर्मदास के गंभीर आरोप
श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख पक्षकार संत धर्मदास ने इस पूरे मामले को एक बड़ा घोटाला करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन की खरीद भगवान के नाम पर न होकर ट्रस्ट के नाम पर की गई है, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। धर्मदास ने दावा किया कि चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों ने सैकड़ों करोड़ रुपये की जमीन को अपने प्रभाव में खरीदा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा ने मंदिर प्रशासन में अपने रिश्तेदारों को नियुक्त कर रखा है। संत धर्मदास ने पूर्व डीएम अनुज झा पर भी मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं और मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि सच सामने आ सके।
ट्रस्ट के सदस्य और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने स्वीकार किया कि मंदिर में दान चोरी की घटनाएं हो रही थीं, जिसकी वजह से मामले ने इतना बड़ा रूप लिया। उन्होंने कहा कि “अब दान चोरी रुक रही है, इसलिए चढ़ावे में बढ़ोतरी दिख रही है।” वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि राम जी का काम करने वालों में यदि कोई दोषी पाया गया, तो वह बख्शा नहीं जाएगा। कटियार ने गोपाल राव का नाम लेते हुए कहा कि जमीन और पैसों के हर लेन-देन में इनकी भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी होगा, उसे सलाखों के पीछे जाना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच बेहद गंभीर है और किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अयोध्या में बढ़ता असंतोष
राम मंदिर जैसे पावन और आस्था के केंद्र के साथ जुड़ी इन अनियमितताओं ने स्थानीय साधु-संतों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। संत समाज का मानना है कि इस घोटाले ने न केवल मंदिर ट्रस्ट की छवि धूमिल की है, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा या यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा।
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