Ram Mandir Case: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी व गबन के आरोपों की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई देश की सर्वोच्च अदालत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जोयमल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच द्वारा की जा रही है। शुक्रवार, 27 जुलाई को हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को नई एसआईटी के गठन की जानकारी दी, साथ ही अदालत ने जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए टीम में एक विशेषज्ञ फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने की जरूरत पर बल दिया।
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नई एसआईटी का गठन और नेतृत्व
सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह दिए गए आदेशों का पालन करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय नई एसआईटी का गठन किया है। इस विशेष जांच टीम की कमान लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस को सौंपी गई है। उनके साथ इस टीम में एक डीआईजी और एक एसएसपी स्तर के अधिकारी को भी शामिल किया गया है ताकि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पेशेवर और पुख्ता हो सके।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि इस पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त किया जाना चाहिए। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस मांग को फिलहाल गैरजरूरी करार दिया और स्पष्ट किया कि खुद सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच इस मामले की नियमित निगरानी कर रही है, इसलिए अलग से निगरानी समिति की आवश्यकता नहीं है।
फोरेंसिक ऑडिट है बेहद जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि चूंकि यह मामला देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर में अर्पित किए गए दान और चढ़ावे से जुड़ा है, इसलिए इसकी तह तक जाने के लिए फोरेंसिक ऑडिट बेहद आवश्यक है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि एसआईटी में एक कुशल फोरेंसिक/चार्टर्ड अकाउंटेंट (विशेषज्ञ ऑडिटर) को भी शामिल किया जाएगा।
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले को बंद नहीं कर रही है, बल्कि उसका मुख्य फोकस एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित करने पर है। भविष्य के लिए प्रशासनिक सुधार के उपायों पर भी अदालत उचित समय पर विचार करेगी। सुनवाई के अंत में कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह अपनी जांच की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट जल्द सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई अब से ठीक दो सप्ताह बाद तय की गई है।
अब तक की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
उधर, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन और अनियमितताओं के मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेजी से जारी है। अयोध्या पुलिस ने इस सिलसिले में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
जांच टीम ने गबन किए गए फंड से जुटाई गई अवैध संपत्तियों के खिलाफ भी शिकंजा कसा है। पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, लग्जरी गाड़ियां, निवेश से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और अन्य संपत्तियां बरामद की हैं, जिन्हें कथित तौर पर मंदिर के चढ़ावे की चोरी के पैसों से खरीदा गया था। एसआईटी के गठन और फोरेंसिक ऑडिट के जुड़ने से अब इस जांच के और अधिक ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
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