Ram Mandir Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने का सनसनीखेज मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी सुरक्षा और व्यवस्था के बीच चोरी होने के बावजूद अब तक पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई? इस गंभीर विषय पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने खुलकर बात की है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर टिप्पणी करने से बचते हुए कई ऐसे संकेत दिए हैं, जो इस मामले की गहराई और जटिलता को दर्शाते हैं।
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FIR दर्ज होने में देरी क्यों? नृपेंद्र मिश्रा ने दिए ये संकेत
एबीपी न्यूज़ की पॉलिटिकल एडिटर मेघा प्रसाद के तीखे सवालों का जवाब देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने साफ किया कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी ठीक नहीं होती। एफआईआर दर्ज न होने के तकनीकी कारणों पर संकेत देते हुए उन्होंने निम्नलिखित बातें कहीं, मिश्रा ने कहा कि जब किसी एक संदिग्ध को ट्रैक करना होता है, तो उसमें भी कई घंटे लग जाते हैं। लेकिन जब एक बड़ी व्यवस्था में कई लोगों की भूमिका की जांच करनी हो, तो स्वाभाविक रूप से समय लगना लाजमी है। उन्होंने संकेत दिया कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विस्तृत पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आग्रह किया था।
सीबीआई जांच और समय सीमा से जुड़े सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि मात्र 15 दिनों के भीतर इतनी बड़ी चोरी की पूरी जांच संपन्न नहीं की जा सकती। एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट केवल यह मार्गदर्शन करेगी कि अगला कदम क्या होना चाहिए, जिसके बाद जांच अधिकारी (IO) को इसकी गहन विवेचना करनी होगी। नृपेंद्र मिश्रा ने इस मामले में टिन्नू यादव से जुड़े सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस प्रकरण में आने वाले समय में आयकर विभाग (Income Tax) की एंट्री भी संभव है।
चंपत राय पर उठे सवाल और सीएम योगी की दूरी
इस विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी आम है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद के बाद से ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से दूरी बना ली है।
इस चर्चा पर विराम लगाते हुए और सीएम योगी के रुख का समर्थन करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने इसे मुख्यमंत्री के ‘उच्चतम विवेक’ का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने इसके पीछे का तर्क समझाते हुए कहा, जिन लोगों से एसआईटी पूछताछ कर रही है, जिनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं या जो किसी भी तरह से जांच के दायरे में आ सकते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री के साथ सार्वजनिक मंचों पर या सरकारी दौरों में दिखाना बिल्कुल भी उचित नहीं होगा।
मिश्रा के मुताबिक, अगर मुख्यमंत्री ऐसे संदिग्ध या जांच के दायरे में आए लोगों के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आएंगे, तो आम जनता के मन में यह भ्रम पैदा हो सकता है कि जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है या फिर इसमें मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप है। इसलिए, सीएम योगी का दूरी बनाना इस बात का प्रमाण है कि वे जांच को पूरी तरह पारदर्शी और स्वतंत्र रखना चाहते हैं। इस बयान से साफ है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जड़ें काफी गहरी हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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