Rajnath Singh Sri Lanka Visit : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका के लिए रवाना हो गए। उनका दौरा 10 सितंबर तक प्रस्तावित है। यात्रा के दौरान वह श्रीलंका के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों और साझा हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत करेंगे। कोलंबो में भारतीय समुदाय के साथ मुलाकात और संवाद भी उनके कार्यक्रम का हिस्सा है।
श्रीलंका नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण वार्ता की तैयारी
श्रीलंका रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि वह नई दिल्ली से तीन दिन के श्रीलंका दौरे के लिए निकल रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत उपयोगी तथा सार्थक रहेगी। उन्होंने श्रीलंका में रहने वाले भारतीय समुदाय से मिलने को लेकर भी उत्साह जताया।
सदियों पुराने रिश्तों को मिलेगा नया आयाम
राजनाथ सिंह ने श्रीलंका को भारत का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया। भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत रिश्ते हैं। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति तथा ‘महासागर’ दृष्टिकोण में श्रीलंका का विशेष रणनीतिक महत्व है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह की यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करना है। वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बहुआयामी साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश
भारत और श्रीलंका के संबंध केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी है। हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली है। दोनों देश साझा हितों वाले विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
आर्थिक संकट में भारत ने दिया था साथ
रक्षा मंत्रालय ने भारत की उस भूमिका को भी रेखांकित किया, जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। उस कठिन दौर में भारत ने अपने पड़ोसी देश को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। इस मदद ने दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूत करने में भूमिका निभाई। संकट की परिस्थितियों में भारत ने श्रीलंका के साथ अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।
चक्रवात के बाद भारत की त्वरित मदद
वर्ष 2025 में श्रीलंका में चक्रवात दितवाह से व्यापक नुकसान हुआ था। इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत शुरुआती सहायता उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा। भारत की त्वरित प्रतिक्रिया को दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और मजबूत संबंधों का उदाहरण माना गया। आपदा के समय मिली मदद ने द्विपक्षीय विश्वास को और मजबूती प्रदान की।
‘पड़ोसी प्रथम’ नीति की झलक
राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के MAHASAGAR दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। भारत का जोर पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा, विकास और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर है। श्रीलंका के साथ मजबूत साझेदारी इसी व्यापक क्षेत्रीय दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
450 मिलियन डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का ऐलान
चक्रवात दितवाह के बाद भारत ने श्रीलंका के लिए 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की थी। इस सहायता का उद्देश्य आपदा से प्रभावित बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना है। इसके तहत सड़कों, रेलवे लाइनों और पुलों की मरम्मत तथा पुनर्निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा प्रबंधन पर जोर
पुनर्निर्माण सहायता के अंतर्गत प्रभावित आवासों के पुनर्वास के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र को दोबारा पटरी पर लाने के अलावा श्रीलंका की आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राजनाथ सिंह की यात्रा से इन व्यापक सहयोग क्षेत्रों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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