Rajnath Singh Statement : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत ने अपनी सशस्त्र सेनाओं को देश की सुरक्षा के सामने आने वाले किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी स्वतंत्रता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना दुश्मन के क्षेत्र में जाकर भी कार्रवाई करने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की मूल नीति शांति और सह-अस्तित्व में विश्वास करने की रही है और देश किसी दूसरे राष्ट्र की जमीन पर कब्जा करने की इच्छा नहीं रखता।
शांति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं
राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति और कमजोरी को एक जैसा नहीं समझा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भय या दबाव के कारण कायम हुई शांति सम्मानजनक नहीं होती, जबकि देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए उठाया गया कदम महत्वपूर्ण होता है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले देशों के साथ सामान्य बातचीत संभव नहीं हो सकती। उन्होंने सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया।
रणनीतिक स्वायत्तता के साथ आगे बढ़ रहा भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता कायम रखते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और हितों से जुड़े फैसले भारत अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के आधार पर ले रहा है। जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक युवाओं को भटकाने, हिंसा को बढ़ावा देने और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने की कोशिशें की गईं, लेकिन सरकार ने इन चुनौतियों का मजबूती से सामना किया।
अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में बदलाव
राजनाथ सिंह ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, क्षेत्र में विकास और प्रगति की गतिविधियों को गति मिली है तथा युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के नए अवसर तैयार हुए हैं। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य नीति में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट हवाई कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों का उदाहरण दिया।
आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र अहम
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अब संघर्ष केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रह गया है। अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र भी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और सटीक मारक क्षमता वाली आधुनिक प्रणालियां युद्ध की रणनीति और संचालन के तरीकों को बदल रही हैं। भारत इन नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है।
रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मिली गति
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत का रक्षा उत्पादन करीब 40,000 करोड़ रुपये तक सीमित था। अब यह बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे देश की रक्षा औद्योगिक क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव बताया। सरकार के अनुसार, घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के साथ विदेशी निर्भरता कम करने में भी मदद मिल रही है।
रक्षा निर्यात में भी भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
राजनाथ सिंह के मुताबिक, भारत का रक्षा निर्यात भी पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है और अब 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। सरकार का जोर आधुनिक तकनीक, घरेलू निर्माण और मजबूत सुरक्षा क्षमताओं के जरिए देश की रक्षा तैयारियों को भविष्य के लिए तैयार करने पर है।
Read More : BRICS Summit से पहले ईरान का भारत पर बड़ा भरोसा, रिश्ते मजबूत करने की तैयारी; चाबहार पर भी नजर










