Gujarat News: सूरत रेलवे स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति! गर्मी में तड़पे मजदूर, भीड़ संभालने के लिए पुलिस ने भांजी लाठियां
रक्षक ही बने भक्षक
राजकोट (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक विजय गुर्जर के अनुसार, हाल ही में तीन प्रमुख बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी भूमिका इस पूरे सिंडिकेट में बेहद अहम थी।
मौलिक कामानी: यस बैंक (पाधाधरी) के पर्सनल मैनेजर।
कल्पेश डांगरिया: एक्सिस बैंक (जामनगर) के मैनेजर।
अनुराग बाल्धा: एचडीएफसी बैंक के पर्सनल बैंकर।
इन अधिकारियों की गिरफ़्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना ‘अंदरूनी मदद’ के इतना बड़ा वित्तीय फ्रॉड अंजाम देना मुमकिन नहीं था।
फर्जी खाते और हवाला का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि ये अधिकारी फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर खाते खुलवाते थे। इनके काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था
अलर्ट को बाइपास करना: यस बैंक के अधिकारी मौलिक कामानी पर आरोप है कि उसने संदिग्ध खातों को न केवल खुलवाया, बल्कि उन्हें इस तरह मैनेज किया कि बड़ी रकम के ट्रांसफर पर बैंक का ‘ऑटोमेटेड अलर्ट’ सिस्टम सक्रिय न हो।
फर्जी वेरिफिकेशन: अनुराग बाल्धा और कल्पेश डांगरिया ने नकली पहचान पत्रों के आधार पर केवाईसी (KYC) और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की, जिससे खाते वैध दिखाई दें।
नकद निकासी और हवाला: ये अधिकारी इन खातों से बड़ी मात्रा में नकदी निकालने में मदद करते थे। इस पैसे को बाद में हवाला चैनलों के जरिए ठिकाने लगाया जाता था, जिससे इसका स्रोत (Source) पता लगाना मुश्किल हो जाए।
85 फर्जी खाते और 535 शिकायतें
पुलिस ने अब तक इस गिरोह से जुड़े 85 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट से जुड़ी अब तक 535 शिकायतें राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज हो चुकी हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस गिरोह ने देशभर में कितने लोगों को अपना निशाना बनाया होगा।









