Rajesh Export Scam: भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत में इस वक्त एक ही नाम की सबसे ज्यादा गूंज है—राजेश मेहता। कभी महज 1,200 रुपये से अपना सफर शुरू करने वाले इस कारोबारी पर अब देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक को अंजाम देने का आरोप लगा है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने बेंगलुरु की मशहूर जूलरी कंपनी ‘राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड’ और इसके चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राजेश मेहता के खिलाफ एक बेहद कड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है।
सेबी की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने पूरे बाजार को सन्न कर दिया है। कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय आंकड़ों में हेराफेरी करने, प्रमोटर से जुड़ी फर्जी संस्थाओं के जरिए निवेशकों और बैंकों के फंड का गलत इस्तेमाल करने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियमों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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99.8% फर्जी रेवेन्यू! सेबी की जांच में खुला खौफनाक सच
सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स ने कथित तौर पर वित्त वर्ष 2021 से लेकर वित्त वर्ष 2025 के बीच अपने बही-खातों में भारी हेरफेर की। कंपनी ने इन चार सालों के दौरान लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (कुल कमाई) दिखाया था।
लेकिन जब सेबी ने इसके खातों की गहराई से फॉरेंसिक जांच की, तो पता चला कि इसमें से 99.8 फीसदी रेवेन्यू पूरी तरह से फर्जी था और इसे सिर्फ कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी का असली बिजनेस न के बराबर था और केवल शेयर की कीमतों को मैनिपुलेट करने के लिए यह करोड़ों का फर्जी टर्नओवर दिखाया जा रहा था।
उधार के ₹1,200 से खड़ा किया था सोने का साम्राज्य
बेंगलुरु में 20 जून, 1964 को जन्मे राजेश मेहता गोल्ड और जूलरी इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा नाम बन चुके थे। बेंगलुरु के सेंट जोसेफ स्कूल से शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद वह बहुत ही कम उम्र में अपने पिता के पारंपरिक जूलरी बिजनेस में हाथ बंटाने लगे। 1980 के दशक की शुरुआत में जब देश में जूलरी का कारोबार पूरी तरह असंगठित था, तब राजेश मेहता और उनके भाई प्रशांत ने कुछ अलग करने की सोची।
दोनों भाइयों ने चांदी के गहनों का एक छोटा सा बिजनेस शुरू करने के लिए अपने सबसे बड़े भाई से महज 1,200 रुपये उधार लिए थे। अपनी मेहनत के दम पर वे जल्द ही दक्षिण भारत के साथ-साथ गुजरात और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में चांदी के आभूषणों के सबसे बड़े थोक व्यापारी (Wholesaler) बनकर उभरे।
इसके बाद साल 1995 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर बाजार में कदम रखा और अपना आईपीओ (IPO) लाकर 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने सोने के कारोबार में रिफाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रिटेल आउटलेट्स तक, पूरी वैल्यू चेन पर कब्जा कर लिया। साल 2015 में राजेश मेहता उस वक्त ग्लोबल सुर्खियों में आए, जब उनकी कंपनी ने 400 मिलियन डॉलर (करीब 3300 करोड़ रुपये) का ऑल-कैश डील करके दुनिया की सबसे बड़ी स्विस गोल्ड रिफाइनरी ‘Valcambi’ को खरीद लिया। फोर्ब्स के मुताबिक, साल 2019 तक राजेश मेहता की व्यक्तिगत नेटवर्थ 1.57 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी थी।
अर्श से फर्श पर आए मेहता
सेबी ने अपने आदेश में साफ कहा है कि राजेश मेहता ही कंपनी के भीतर सारे वित्तीय और प्रशासनिक फैसले लेते थे और सहायक कंपनियों के दैनिक कामकाज पर उनका पूरा नियंत्रण था। इस घोटाले के सामने आने के बाद सेबी ने राजेश मेहता पर शेयर बाजार में किसी भी तरह की ट्रेडिंग (खरीदने-बेचने) करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
इस खबर के आते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर औंधे मुंह गिरे और बाजार खुलते ही 5% के लोअर सर्किट पर लॉक हो गए। इस घोटाले की आंच देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) तक भी पहुंच गई है, जिसके चलते एलआईसी के शेयरों में भी 1% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। दरअसल, राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के मुताबिक, एलआईसी की इस कंपनी में 10.80% की बड़ी हिस्सेदारी है। इस महा-घोटाले ने एलआईसी के जरिए देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों के पैसे को भी जोखिम में डाल दिया है।
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