Kerala Politics: केरल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग (ECI) से औपचारिक रूप से मांग की है कि चंद्रशेखर की उम्मीदवारी को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। पार्टी का दावा है कि चंद्रशेखर ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी वास्तविक संपत्ति की जानकारी छुपाई है, जो चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
200 करोड़ के बंगले को लेकर तीखे सवाल
कांग्रेस के आरोपों के केंद्र में बेंगलुरु के पॉश इलाके कोरमंगला में स्थित एक भव्य बंगला है। कांग्रेस का दावा है कि राजीव चंद्रशेखर के पास इस क्षेत्र में लगभग 49,000 स्क्वायर फीट का एक आलीशान बंगला है, जिसकी बाजार दर के अनुसार वर्तमान कीमत लगभग 200 करोड़ रुपये है। पार्टी का आरोप है कि इतने बड़े निवेश और संपत्ति के मालिक होने के बावजूद, चंद्रशेखर ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों में इसका उल्लेख नहीं किया है, जो सीधे तौर पर पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सोशल मीडिया पर ‘आदतन अपराधी‘ का टैग
केरल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने चंद्रशेखर को ‘आदतन अपराधी’ करार देते हुए कहा कि वह बार-बार चुनाव आयोग को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। पोस्ट में कहा गया कि यह अविश्वसनीय है कि एक सफल और अरबपति बिजनेसमैन होने के बावजूद, उनके हलफनामे के अनुसार उनके पास न तो रहने के लिए अपनी कोई निजी संपत्ति है और न ही कोई कार। कांग्रेस ने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम बताया है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठते सवाल
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को संबोधित करते हुए कहा कि यदि इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी है। पार्टी ने ‘पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट’ (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम) का हवाला देते हुए मांग की है कि गलत जानकारी देने के आधार पर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि एक हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार को नियमों के उल्लंघन की छूट मिलती है, तो इससे लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी और आम जनता का चुनावी प्रक्रिया से भरोसा उठ जाएगा।
हलफनामे में विसंगतियों का पूरा मामला
विवाद का मुख्य कारण वह हलफनामा है जो नामांकन के समय जमा किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि एक तरफ चंद्रशेखर की व्यावसायिक पहचान एक बड़े उद्योगपति की है, वहीं दूसरी तरफ उनके कागजात उन्हें संपत्ति विहीन दिखा रहे हैं। पार्टी ने इस विरोधाभास को ‘साजिशन डेटा छिपाना’ करार दिया है। विपक्षी दल का मानना है कि संपत्तियों का सही मूल्यांकन न बताना केवल एक तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि मतदाताओं के साथ धोखाधड़ी है ताकि एक सादगीपूर्ण छवि पेश की जा सके।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और भविष्य की राह
इस शिकायत के बाद केरल और कर्नाटक दोनों राज्यों की राजनीति में गर्माहट बढ़ गई है। जहाँ भाजपा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे कानून के शासन की लड़ाई मान रही है। अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। यदि आयोग इस शिकायत पर जांच शुरू करता है, तो यह राजीव चंद्रशेखर की चुनावी संभावनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग इस पर कोई कड़ा कदम उठाता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।









