CAPF Bill 2026: ‘जवानों के साथ संस्थागत अन्याय’, राहुल गांधी ने CAPF कानून हटाने की खाई कसम

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक 2026 की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आईईडी ब्लास्ट में अपना पैर गंवाने वाले असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण देते हुए जवानों के प्रमोशन और नेतृत्व के अधिकारों पर हो रहे 'संस्थागत अन्याय' का गंभीर आरोप लगाया।

CAPF Bill 2026

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 2, 2026

CAPF Bill 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए उन्होंने सीआरपीएफ (CRPF) के बहादुर असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक के बहाने सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने लिखा कि अजय मलिक जैसे जांबाज अफसर, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया, उन्हें बदले में सिर्फ अनदेखी मिली है। बता दें कि अजय मलिक ने एक नक्सली मुठभेड़ के दौरान आईईडी (IED) ब्लास्ट में अपना एक पैर गंवा दिया था।

बहादुर अर्धसैनिक बल जवानों के साथ संस्थागत भेदभाव का आरोप

राहुल गांधी ने असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक के अदम्य साहस का हवाला देते हुए लिखा कि उन्होंने देश सेवा में अपना पैर खो दिया। लेकिन इस महान बलिदान के बदले उन्हें क्या मिला? 15 वर्षों से अधिक की अटूट और निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद उन्हें कोई पदोन्नति (Promotion) नहीं मिली। दुखद यह है कि उन्हें अपनी ही फोर्स का नेतृत्व करने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है, क्योंकि बल के सभी शीर्ष नेतृत्व पद केवल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों के लिए आरक्षित रखे गए हैं।

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक जांबाज अधिकारी की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों अर्धसैनिक बल (Paramilitary Force) के जवानों के साथ हो रहा एक बड़ा संस्थागत अन्याय है। ये जांबाज जवान सीमाओं की चौखट पर तैनात रहते हैं, आतंकवाद और उग्रवाद से सीधा लोहा लेते हैं, और देश में चुनावों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराते हैं। लेकिन जब उनके अधिकारों और सम्मान की बात आती है, तो पूरी व्यवस्था उनसे मुंह मोड़ लेती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी

कांग्रेस नेता ने मौजूदा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि खुद अर्धसैनिक बलों के जांबाज इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था के घोर विरोधी हैं। यहां तक कि देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने भी इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके बावजूद, मौजूदा सरकार इसी भेदभाव को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर तुली हुई है। राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह विधेयक केवल उनके करियर को रोकने का एक प्रयास नहीं है, बल्कि यह देश की पहली रक्षा पंक्ति का मनोबल तोड़ने की एक सोची-समझी साजिश है। जब इन वीर जवानों का मनोबल टूटता है, तो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद हिल जाती है।

कांग्रेस सत्ता में आई तो खत्म होगा यह कानून

जवानों को नेतृत्व का हक दिलाने का वादा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सुरक्षा बलों का सम्मान केवल कोरे शब्दों में नहीं, बल्कि अपनी ठोस नीतियों में करती है। उन्होंने देश के जवानों से यह साफ वादा किया कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस कड़े और भेदभावपूर्ण कानून को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा। उनका स्पष्ट मानना है कि जो वीर मैदान-ए-जंग में देश के लिए खून बहाता है, उसे अपनी फोर्स का नेतृत्व करने का पूरा अधिकार मिलना ही चाहिए।

क्या है नया प्रस्तावित CAPF कानून और कैडर विवाद?

यह नया विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (जैसे- CRPF, CISF, BSF, ITBP और SSB) के प्रशासन, सेवा शर्तों और संचालन समन्वय के लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचा प्रदान करने का प्रयास करता है। वर्तमान में ये सभी सुरक्षा बल अपने-अपने अलग अधिनियमों के तहत काम करते हैं। इस नए कानून के तहत प्रावधान किया गया है कि शीर्ष रैंकों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) को कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए। विधेयक के अनुसार, महानिरीक्षक (IG) के पद के 50 प्रतिशत और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 प्रतिशत पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे। उल्लेखनीय है कि यह प्रस्तावित कानून सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद लाया गया है, जिसमें कोर्ट ने सीएपीएफ में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने को कहा था।