Petrol Diesel Price Hike : देश में एक बार फिर सोमवार (25 मई) को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। आम जनता अभी पिछले झटकों से उबर भी नहीं पाई थी कि पिछले 10 दिनों के भीतर सरकार ने चौथी बार ईंधन के दामों में बढ़ोतरी कर दी। इस लगातार हो रही मूल्यवृद्धि के कारण आम आदमी का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। तेल कंपनियों द्वारा बार-बार बढ़ाए जा रहे दामों ने घरेलू बाजार में महंगाई की एक नई लहर पैदा कर दी है, जिससे हर वर्ग के लोग खासे परेशान नजर आ रहे हैं।
राहुल गांधी का तीखा तंज
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार एक साथ दाम न बढ़ाकर किश्तों में ईंधन की कीमतें बढ़ा रही है, ताकि आम लोगों को इसका अहसास न हो और वे इसका खुलकर विरोध न कर सकें। उन्होंने इसे जनता की जेब पर ‘चुपचाप डाका’ डालना करार दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री को ‘इन्फ्लेशन मैन’ की उपाधि दी और कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है।
आर्थिक संकट की चेतावनी और चुनावी वादों पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने अपने बयान में आगे कहा कि वे पिछले कई महीनों से देश में आने वाले गंभीर आर्थिक संकट को लेकर सरकार को सचेत कर रहे थे। लेकिन प्रधानमंत्री हमेशा की तरह उस समय केवल चुनावों में व्यस्त थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल को सीधे 8 रुपये तक महंगा कर दिया गया है और यह सिलसिला अभी रुकने वाला नहीं है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम मोदी का एक ही मुख्य काम रह गया है- चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करना और चुनाव बीत जाने के बाद जनता की जेब पर वार करना।
मल्लिकार्जुन खरगे का हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जनता को लूटने का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मात्र 10 दिनों के भीतर चौथी बार दाम बढ़ाना इस बात का सबूत है कि सरकार को आम लोगों की सहूलियत से कोई सरोकार नहीं है। खरगे ने तीखे शब्दों में कहा कि मोदी सरकार ने देश के मध्यम और गरीब वर्ग की बची-कुची बचत को पूरी तरह से जलाने के लिए उस पर पेट्रोल छिड़कने का काम किया है।
यूपीए और मोदी शासन के आंकड़ों की तुलना से घेरा
अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने यूपीए शासनकाल और मौजूदा मोदी सरकार के कार्यकाल के आंकड़ों की तुलना भी की। उन्होंने याद दिलाया कि 2004 से 2014 के बीच जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 175.34% की भारी बढ़ोतरी हुई थी, फिर भी घरेलू कीमतें नियंत्रण में थीं। इसके विपरीत, मोदी सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम नहीं बढ़े, फिर भी पेट्रोल की कीमत 2014 के ₹71.41 से बढ़ाकर 2026 में ₹102.12 (43.01% वृद्धि) और डीजल की कीमत ₹56.71 से बढ़ाकर ₹95.20 (67.87% वृद्धि) कर दी गई है।
दो सप्ताह में ₹7 से ज्यादा बढ़े दाम
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹2.61 की बढ़त के साथ ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 की तेजी के साथ ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इससे पहले 15 मई को ₹3, 19 मई को 90 पैसे और 23 मई को करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह महज दो हफ्तों में ईंधन ₹7 से ज्यादा महंगा हो चुका है। देश के अन्य महानगरों जैसे कोलकाता में पेट्रोल ₹113.51, मुंबई में ₹111.21 और चेन्नई में ₹107.77 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर बिक रहा है, जिससे पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है।










