Rahul Gandhi Attack: 18 Metro Station बंद होने पर सरकार पर बरसे राहुल, पेपर लीक को लेकर बड़ा वार

18 मेट्रो स्टेशन बंद होने और पेपर लीक मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने युवाओं और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाते हुए जवाब मांगे। आखिर मेट्रो बंदी का फैसला क्यों लिया गया और राहुल गांधी के आरोपों का क्या असर होगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Rahul Gandhi Attack

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 25, 2026

Rahul Gandhi Attack:  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में मेट्रो के 18 स्टेशनों को बंद किए जाने के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा और करारा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार देश में हो रहे लगातार पेपर लीक को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है, लेकिन आम जनता के आवागमन को बाधित करने के लिए मेट्रो सेवाओं को जरूर रोका जा रहा है।

दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों का व्यापक आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन और 20 जुलाई को हुए ‘संसद मार्च’ के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर सरकार ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का सिलसिला शुरू किया, जो धीरे-धीरे बढ़कर 18 स्टेशनों तक पहुंच गया है।

सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की पोस्ट, सरकार के कदमों पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार की दमनकारी नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा कि मेट्रो बंद करो, रास्ते बंद करो, दुकानें बंद करो, इंटरनेट बंद करो, और खाने-पीने की आपूर्ति रोको। अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे देश के भविष्य यानी छात्रों के खिलाफ सरकार द्वारा इस तरह के क्रूर और तानाशाही कदम उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए आगे लिखा कि सरकार सब कुछ बंद करने की कोशिश कर रही है, लेकिन देश में युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाले ‘पेपर लीक’ जैसी गंभीर समस्या को बंद करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रही है।

मेट्रो स्टेशन बार-बार बंद होने से आम यात्रियों और जनता में भारी आक्रोश

प्रशासन द्वारा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नाम पर बार-बार मेट्रो स्टेशनों को बंद करने तथा यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के फैसले के कारण आम यात्रियों और दैनिक रेलयात्रियों में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है। आम नागरिकों ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर हर0 दिन अपने रोजमर्रा के कामों के लिए सफर करने वाले हजारों-लाखों आम लोगों को इस तरह क्यों परेशान किया जा रहा है। कई कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों का कहना है कि मेट्रो बंद होने से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, लोगों ने यह भी आशंका जताई है कि ऐसी पाबंदियों से ऐप आधारित कैब और टैक्सियों का किराया भी आसमान छूने लगेगा।

जनता के पैसे से चलने वाली डीएमआरसी और यात्रियों के तीखे सवाल

यात्रियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी डीएमआरसी को सीधे तौर पर टैग करते हुए तीखे सवाल पूछे हैं। लोगों ने कड़े शब्दों में पूछा है कि क्या डीएमआरसी अधिकारियों का यह संस्थान उनके निजी पैसों से चलता है या फिर यह देश की आम जनता के दिए गए टैक्स के पैसों से संचालित होता है? जनता ने अधिकारियों से मांग की है कि वे स्टेशनों को अचानक बंद करने के पीछे का सटीक और वास्तविक कारण स्पष्ट करें। यात्रियों का यह भी मानना है कि इस तरह की प्रशासनिक पाबंदियों और सुरक्षा घेराबंदी से विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र और युवा जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रुकने वाले नहीं हैं, बल्कि इसके विपरीत आम जनता को अनावश्यक रूप से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

नीट पेपर लीक और केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार जारी है आंदोलन

मध्य दिल्ली के विभिन्न इलाकों में पिछले काफी समय से छात्र संगठन और विभिन्न राजनीतिक दल प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले को लेकर बेहद आक्रोशित हैं और वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। इस आंदोलन के दौरान मध्य दिल्ली में छात्रों और युवाओं की भारी भीड़ लगातार उमड़ रही है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका और सरकार की नीतियों पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं तथा इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की हर तरफ तीखी आलोचना की जा रही है।

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