Rafale Upgrade: भारतीय वायुसेना अपनी ताकत को लगातार आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। फाइटर जेट्स की कमी को दूर करने और हवाई युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए भारत फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय इस डील को लेकर गहन विचार-विमर्श में जुटा है और माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा के दौरान इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
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राफेल में शामिल होंगी स्वदेशी Astra मिसाइलें
इस बीच भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना अपने राफेल फाइटर जेट्स को स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली Astra MK1 और Astra MK2 मिसाइलों से लैस करने की योजना पर काम कर रही है। ये मिसाइलें बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAM) श्रेणी की हैं, जो दुश्मन के विमानों को काफी दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम हैं। रक्षा सूत्रों के अनुसार, राफेल में Astra मिसाइलों के इंटीग्रेशन की टेस्टिंग अगले दो वर्षों में शुरू हो सकती है और 2028 तक यह प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
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तेजस में तैनात है Astra MK1
रक्षा से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक Astra MK1 मिसाइल पहले ही भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और LCA तेजस फाइटर जेट्स में शामिल की जा चुकी है। यह मिसाइल 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बना सकती है। इसकी सटीकता और विश्वसनीयता ने भारतीय वायुसेना की हवाई ताकत को काफी बढ़ाया है। Astra मिसाइल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिससे भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होती है।
Astra MK2 से और बढ़ेगी मारक क्षमता

भविष्य में Astra MK2 मिसाइल को भी राफेल और Su-30MKI में शामिल करने की योजना है। Astra MK2 की मारक क्षमता लगभग 160 किलोमीटर तक होगी, जो इसे दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइलों में शामिल कर देती है। यह यूरोपीय देशों द्वारा विकसित मेटियोर मिसाइल के बराबर मानी जा रही है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक राफेल के निर्माता डसॉल्ट एविएशन और थेल्स ने इस अपग्रेडेशन के लिए तकनीकी सहयोग देने पर सहमति जताई है। यह सहयोग मिसाइल और फाइटर जेट के बीच बेहतर तालमेल के लिए बेहद अहम है।
एडवांस रडार और सॉफ्टवेयर से मिलेगी नई ताकत

Astra मिसाइलों को राफेल के उन्नत RBE2 AESA रडार और उसके कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर अपग्रेड तैयार किए जा रहे हैं। इससे राफेल मिसाइल की गाइडेंस, ट्रैकिंग और टारगेट लॉक करने की क्षमता का पूरा फायदा उठा सकेगा। युद्ध की स्थिति में यह सिस्टम कई चरणों से गुजरकर दुश्मन को सटीक और तेज़ जवाब देने में सक्षम होगा।
चीन और पाकिस्तान के लिए बढ़ेगी चुनौती
राफेल फाइटर जेट्स में Astra मिसाइलों के इंटीग्रेशन की खबर से पाकिस्तान और चीन की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है। भारत जिस स्तर की स्वदेशी मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, उसका इस्तेमाल अमेरिका और यूरोपीय देश भी करते हैं। ऐसे में Astra से लैस राफेल भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाएगा और क्षेत्रीय संतुलन पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।
भारत सरकार के जल शक्ति और पर्यटन मंत्रालय द्वारा दिया गया है यह अवार्ड










