R Sarath Death : मलयालम सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक, पटकथा लेखक और सांस्कृतिक प्रशासक आर सरथ का सोमवार, 7 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया। वह 65 वर्ष के थे। लंबे समय से किडनी संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान सरथ का उपचार तिरुवनंतपुरम के KIMS अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर सामने आते ही मलयालम फिल्म उद्योग और केरल के कला-सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
‘सयाह्नम’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर
कोल्लम जिले के पुनालूर निवासी आर सरथ ने वर्ष 2000 में ‘सयाह्नम’ के जरिए निर्देशन और पटकथा लेखन की दुनिया में कदम रखा। यह फिल्म उनके करियर की पहचान बन गई। फिल्म को सात केरल राज्य फिल्म पुरस्कार मिले। इसके अलावा इसे सर्वश्रेष्ठ प्रथम फिल्म के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जिससे सरथ की प्रतिभा को शुरुआती दौर में ही व्यापक पहचान मिली।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बनाई खास पहचान
‘सयाह्नम’ की सफलता भारत तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2001 में इसे म्यूनिख इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रतियोगिता खंड में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद भी फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय समारोहों में जगह मिली। इस उपलब्धि ने आर सरथ के काम को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया और उन्हें भारतीय समानांतर सिनेमा के चर्चित फिल्मकारों में पहचान दिलाई।
सामाजिक विषयों को फिल्मों का बनाया आधार
सरथ ने वर्ष 2003 में ‘स्थिति’ का निर्देशन किया, जिसे बैंकॉक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। वर्ष 2006 में आई ‘शीलावती’ में भी उन्होंने गंभीर सामाजिक विषयों को केंद्र में रखा। फिल्म का प्रीमियर ताइवान में हुए एशिया पैसिफिक फिल्म फेस्टिवल में हुआ। उनकी रचनाओं में मनोरंजन के साथ सामाजिक संवेदनाओं, मानवीय संघर्षों और जीवन की जटिलताओं को प्रमुखता मिलती थी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाली फिल्मों का हिस्सा बने
वर्ष 2011 में आर सरथ ने इंडो-चाइनीज सहयोग से बनी ‘द डिजायर: ए जर्नी ऑफ अ वुमन’ का निर्देशन किया और सह-लेखन में भी योगदान दिया। फिल्म में एक महिला की यात्रा और उसके अनुभवों को प्रमुखता से दिखाया गया। इसके अलावा वर्ष 2012 की ‘पैराडाइज’ को मैक्सिको इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और एम्स्टर्डम फिल्म फेस्टिवल में सम्मान मिला।
चार्ली चैपलिन पर भी किया रचनात्मक काम
आर सरथ ने सिनेमा के इतिहास और महान कलाकारों पर भी काम किया। महान अभिनेता चार्ली चैपलिन के अभिनय करियर के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उन्होंने ‘बुद्धन चिरिक्कुन्नु’ का निर्देशन किया। उनके रचनात्मक कार्यों में सिनेमा के साथ इतिहास, कला और संस्कृति के प्रति गहरी रुचि स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।
कला विरासत पर शोध में भी रहा योगदान
फिल्म निर्माण के अलावा सरथ सांस्कृतिक विरासत के शोध से भी जुड़े रहे। डॉक्यूमेंट्री ‘द पेंटेड एपिक्स’ से जुड़े शोध के दौरान उन्होंने किलुनूर मंदिर में राजा रवि वर्मा से संबंधित दुर्लभ भित्तिचित्रों की खोज की। भारत सरकार के सांस्कृतिक विभाग ने वर्ष 1996 में उनके शोध कार्य के लिए उन्हें जूनियर फेलोशिप भी प्रदान की थी।
सांस्कृतिक प्रशासन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
सरथ ने केरल के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में उप निदेशक के तौर पर काम किया। इसके बाद उन्होंने सांस्कृतिक विभाग के अंतर्गत MPCC के निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। वह भारत भवन के सचिव भी रहे। इस तरह उनका योगदान फिल्म निर्देशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की कला, संस्कृति और प्रशासनिक गतिविधियों तक विस्तृत रहा।
पुरस्कारों से समृद्ध रहा रचनात्मक करियर
अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर आर सरथ ने फिल्म निर्माण और पत्रकारिता का प्रशिक्षण भी लिया था। अपने लंबे करियर में उन्होंने नौ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के अलावा एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार हासिल किए। उनकी रचनाओं ने सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय भावनाओं को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।
मलयालम सिनेमा को हुई अपूरणीय क्षति
आर सरथ के निधन को मलयालम सिनेमा और केरल के सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। निर्देशक और लेखक के रूप में उन्होंने संवेदनशील विषयों को पर्दे पर उतारा, जबकि शोधकर्ता और सांस्कृतिक प्रशासक के रूप में कला एवं विरासत के संरक्षण में योगदान दिया। सिनेमा, साहित्य, पत्रकारिता और संस्कृति के बीच उनकी बहुआयामी यात्रा उनकी स्थायी विरासत के रूप में याद की जाएगी।
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