Puri Jagannath Temple: रत्न भंडार के खजाने की गिनती फिर शुरू, 11 अप्रैल तक चलेगा पहला चरण

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के ऐतिहासिक 'रत्न भंडार' के खजाने की गिनती और सूचीकरण का कार्य 8 अप्रैल 2026 से पुनः शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया दो चरणों में 18 अप्रैल तक चलेगी, जिसकी पारदर्शिता के लिए 3D मैपिंग और वीडियोग्राफी की जा रही है।

Puri Jagannath Temple

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 8, 2026

Puri Jagannath Mandir: ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रहस्यमयी और समृद्ध ‘रत्न भंडार’ (Ratna Bhandar) के गहनों और कीमती वस्तुओं की गिनती की प्रक्रिया बुधवार, 8 अप्रैल 2026 से एक बार फिर शुरू हो गई है। प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और चरणबद्ध तरीके से संपन्न कर रहा है, ताकि मंदिर की परंपराओं और सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।

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दो चरणों में होगी गिनती की प्रक्रिया

Puri Jagannath Temple
रत्न भंडार के खजाने की गिनती फिर शुरू

प्रशासन ने रत्न भंडार के खजाने की सूची तैयार करने (Inventory) और उनकी भौतिक गणना के लिए एक विस्तृत समय सारणी तैयार की है। गणना का यह प्रारंभिक दौर 11 अप्रैल तक चलेगा। इसमें मुख्य रूप से उन वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिन्हें बाहरी कक्षों में रखा गया है। इसके बाद 13 से 18 अप्रैल के बीच दूसरे चरण की गिनती की जाएगी। इस दौरान खजाने के अधिक आंतरिक और महत्वपूर्ण हिस्सों की सूची बनाई जाएगी।

गर्भगृह बंद, भक्तों के लिए दर्शन की वैकल्पिक व्यवस्था

खजाने की गिनती के दौरान सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए मंदिर के गर्भगृह को आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। हालांकि, भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। श्रद्धालु मंदिर के बाहरी कक्ष यानी ‘जगमोहन’ से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर सकते हैं।

मंदिर की दैनिक रस्में और अनुष्ठान प्रभावित न हों, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। गिनती के समय को इस तरह निर्धारित किया गया है कि सेवायतों को अपनी धार्मिक जिम्मेदारियां निभाने में कोई बाधा न आए।

आभूषणों की नाजुकता और 3D मैपिंग का उपयोग

रत्न भंडार में रखे सोने, चांदी के आभूषण और रत्न सदियों पुराने हैं। प्रशासन के अनुसार, इसमें राजराजेश्वर का राजसी वेश और अन्य अत्यंत नाजुक वस्तुएं शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 3D मैपिंग, हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जा रही है।आभूषणों के प्राचीन होने के कारण विशेषज्ञों की टीम बहुत धीरे और सावधानी से गिनती कर रही है, यही वजह है कि इस प्रक्रिया में उम्मीद से अधिक समय लग रहा है।

नई ‘रत्न पालंकियां’ और पुनर्स्थापन कार्य

मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भगवान के लिए तीन नई ‘रत्न पालंकियां’ तैयार की गई हैं। इन नई पालंकियों को बनाने में पुरानी पालंकियों के उन हिस्सों का उपयोग किया गया है जो हाथी दांत से बने थे। यह कार्य वरिष्ठ सेवायतों की देखरेख और शास्त्रों के अनुसार संपन्न हुआ है। गिनती पूरी होने के बाद, गर्भगृह के आवश्यक मरम्मत और पुनर्स्थापन का कार्य किया जाएगा ताकि मंदिर की संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रहे।

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