Punjab Update: बेअदबी पर नया कानून और जांच सिस्टम लागू, अब साजिशकर्ताओं पर कसेगा शिकंजा?

अमृतसर. पंजाब में बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए जहां ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ को मंजूरी दी है, वहीं अब जांच प्रक्रिया को भी और मजबूत बना दिया गया है। कानून लागू होने के बाद पंजाब पुलिस ने इन मामलों की जांच के लिए नई मानक कार्य प्रणाली (SOP) जारी की है, जिसे पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने तैयार किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बेअदबी मामलों में पारदर्शिता, सटीकता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पुलिस को अब हर मामले में वैज्ञानिक तरीके से जांच करनी

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Published On :

अप्रैल 20, 2026

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अमृतसर.

पंजाब में बेअदबी जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए जहां ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ को मंजूरी दी है, वहीं अब जांच प्रक्रिया को भी और मजबूत बना दिया गया है। कानून लागू होने के बाद पंजाब पुलिस ने इन मामलों की जांच के लिए नई मानक कार्य प्रणाली (SOP) जारी की है, जिसे पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने तैयार किया है।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बेअदबी मामलों में पारदर्शिता, सटीकता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पुलिस को अब हर मामले में वैज्ञानिक तरीके से जांच करनी होगी और डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि जांच 60 से 90 दिनों के भीतर पूरी कर अदालत में चालान पेश किया जाए। नई व्यवस्था के तहत सूचना मिलते ही थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को तुरंत घटना स्थल पर पहुंचना होगा।

वहां सबूतों की सुरक्षा के लिए दो स्तर का घेरा बनाया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति सबूतों से छेड़छाड़ न कर सके। धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र अंगों या अन्य धार्मिक प्रतीकों को केवल अधिकृत धार्मिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही संभाला जाएगा। हर घटना स्थल की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, साथ ही उसका नक्शा भी तैयार किया जाएगा। फॉरेंसिक विशेषज्ञों को तुरंत बुलाकर वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। पुलिस केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे की साजिश और मुख्य आरोपी तक पहुंचगी।

डिजिटल माध्यमों पर होगी कड़ी नजर
डिजिटल माध्यमों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। भ्रामक संदेश, डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक सामग्री की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल लेनदेन और संदिग्ध फंडिंग की भी जांच होगी।
यदि आरोपी की मानसिक स्थिति संदिग्ध पाई जाती है, तो विशेषज्ञों के बोर्ड द्वारा उसका परीक्षण कराया जाएगा। इन मामलों की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा सीधे की जाएगी।
नए कानून में उम्र कैद तक की सजा का प्रवधान
नए कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे मामलों को गैर-जमानती रखा गया है, जिससे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य धार्मिक आस्था और मर्यादा की रक्षा करना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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