Punjab News: चंडीगढ़ जिला अदालत में 11 साल पुराने चर्चित कोटकपूरा गोलीकांड मामले की सुनवाई के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल वीरवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों और आदेशों के बाद इस संवेदनशील मामले की सुनवाई को मोगा या फरीदकोट से ट्रांसफर करके चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसके चलते सभी कानूनी प्रक्रियाएं अब चंडीगढ़ की विशेष अदालत में ही पूरी की जा रही हैं।
Punjab Politics: SIR विवाद में राघव चड्ढा का नाम, AAP पर बरसे नेता- ‘यह
विदेश यात्रा से लौटने के बाद लगाई हाजिरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले ही सुखबीर सिंह बादल ने अदालत से औपचारिक रूप से अनुमति प्राप्त करके विदेश यात्रा की थी। अपनी विदेश यात्रा से वापस लौटने के तुरंत बाद, उन्होंने कानूनी नियमों का पालन करते हुए बिना किसी देरी के चंडीगढ़ जिला अदालत में पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विधिवत हाजिरी लगाई। इस दौरान अदालत परिसर में उनके कानूनी सलाहकार और अधिवक्ता राजेश कुमार राय भी उनके साथ पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। अदालत में उनकी यह पेशी कानूनी कार्यवाही के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या है 11 साल पुराना कोटकपूरा गोलीकांड?
यह पूरा बहुचर्चित मामला 14 अक्टूबर 2015 का है, जब फरीदकोट जिले के बरगाड़ी में हुए पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के बेअदबी कांड के विरोध में पंजाब के कोटकपूरा और बहिबल कलां इलाकों में हजारों की संख्या में लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति उस समय अत्यधिक तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस बल ने भीड़ पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस दर्दनाक और हिंसक पुलिस फायरिंग में बहिबल कलां के गांव सरावां के रहने वाले गुरजीत सिंह और नियामीवाला गांव के कृष्ण भगवान सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कोटकपूरा में हुए संघर्ष और गोलीबारी में कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था और इसे लेकर पंजाब की राजनीति में भारी उबाल आया था।
मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक शामिल थे आरोपी
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज की। एडीजीपी एलके यादव के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने फरवरी 2023 में इस मामले में एक विस्तृत चालान अदालत में पेश किया था। इस चार्जशीट में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) सुमेध सिंह सैनी सहित छह शीर्ष पुलिस अधिकारियों को मुख्य आरोपी बनाया गया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निधन हो जाने के कारण उनके विरुद्ध चल रही कानूनी कार्रवाई को औपचारिक रूप से बंद कर दिया गया था, लेकिन अब इस मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ सुनवाई तेजी से आगे बढ़ रही है।
Punjab News: अरविंद मिश्रा को BJP ने दिखाया बाहर का रास्ता, पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का










