Punjab News: पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान, कलह और गुटबाजी को थामने के लिए पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने और बिखरे हुए कुनबे को एकजुट करने की कोशिशों के तहत, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी इसी महीने के अंत में पंजाब के दौरे पर आ सकते हैं। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी के इस संभावित दौरे के दौरान सबसे पहले उनके अमृतसर पहुंचने और विश्व प्रसिद्ध श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में माथा टेककर नतमस्तक होने की संभावना है। राहुल गांधी के इस संभावित कार्यक्रम के सामने आते ही पंजाब कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों और नेताओं के बीच हलचल काफी तेज हो गई है।
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राहुल गांधी के संभावित दौरे और बैठकों के मायने
राहुल गांधी के इस संभावित पंजाब दौरे को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उनके इस दौरे के दौरान केवल धार्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और प्रदेश इकाई के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ कई दौर की अहम बंद कमरे में बैठकें भी हो सकती हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य राज्य में पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को दूर करना और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करना है। हालांकि, अभी तक राहुल गांधी के इस दौरे का आधिकारिक और अंतिम कार्यक्रम (Itinerary) पूरी तरह तय नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी के भीतर इसकी तैयारियां और चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।
दिल्ली में बैठकों का दौर जारी
दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी पंजाब कांग्रेस के संकट को सुलझाने के लिए बैठकों का दौर लगातार जारी है। राज्य के वरिष्ठ नेता लगातार दिल्ली पहुंचकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं और पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, सांगठनिक ढांचे तथा आगामी चुनावों की तैयारियों पर गहन मंथन कर रहे हैं।
इसी कड़ी में हाल ही में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दिल्ली में राहुल गांधी से विशेष मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात के दौरान प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब कांग्रेस के सभी विधायकों के साथ राहुल गांधी की एक सामूहिक बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है और इसके लिए समय भी मांगा है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व अब राज्य के हर एक प्रमुख नेता को भरोसे में लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने की बड़ी चुनौती
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस हाईकमान कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। पार्टी नेतृत्व अच्छी तरह जानता है कि यदि चुनाव से पहले आंतरिक कलह और गुटबाजी को समाप्त नहीं किया गया, तो पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व खुद मोर्चा संभालते हुए राज्य के नेताओं को एकजुट करने में जुट गया है। राहुल गांधी का संभावित अमृतसर दौरा और पार्टी नेताओं के साथ होने वाली बैठकें इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा हैं। फिलहाल, सभी राजनीतिक विश्लेषकों और पंजाब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की नजरें राहुल गांधी के इस संभावित दौरे के आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं, क्योंकि यह दौरा तय करेगा कि आगामी चुनावों में कांग्रेस पार्टी किस तेवर और एकजुटता के साथ मैदान में उतरेगी।
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