चंडीगढ़
गुरुग्राम में एक और निजी विश्वविद्यालय खुलेगा। कैबिनेट ने मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए विधानसभा में संशोधन विधेयक लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके लिए हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट-2006 में संशोधन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय की स्थापना शांति फाउंडेशन ट्रस्ट गुरुग्राम की ओर से की जाएगी। प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए करीब 5.14 एकड़ जमीन उपलब्ध है और वहां 1.07 लाख वर्गफुट से अधिक निर्मित भवन पहले से तैयार है। यानी विश्वविद्यालय के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा करने का बड़ा हिस्सा पहले ही मौजूद है। प्रस्ताव के अनुसार ट्रस्ट के पास विश्वविद्यालय के लिए जमीन 30 साल की लीज पर है।
साइट पर बने भवन में करीब 96,600 वर्गफुट शैक्षणिक क्षेत्र, 5,400 वर्गफुट प्रशासनिक क्षेत्र और 5,000 वर्गफुट अन्य सुविधाओं के लिए जगह है। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालय के लिए केवल जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही, बल्कि तैयार भवन और शैक्षणिक ढांचे का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
निजी क्षेत्र के जरिए बढ़ेगी उच्च शिक्षा की क्षमता
सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय खुलने से प्रदेश के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के विकल्प बढ़ेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और संस्थागत क्षमता को विस्तार मिलेगा। प्रस्ताव को निजी विश्वविद्यालय कानून के तहत गठित अकादमिक और वित्त समिति ने जांचा।
हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन की अध्यक्षता वाली समिति ने भी निर्धारित शर्तों के साथ लेटर आफ इंटेंट जारी करने की सिफारिश की थी। ट्रस्ट की ओर से शर्तों की अनुपालना रिपोर्ट भी जमा कराई गई, जिसका सत्यापन किया गया।
सरकार ने इस पहल को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य से भी जोड़ा है। गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में नया विश्वविद्यालय खुलने से उच्च शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर एक और विकल्प उपलब्ध होगा। अब अगला कदम विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश करना है। इसके पारित होने के बाद ही मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी को औपचारिक रूप से स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।










