Independence Day 2026 : भारत को पहले मिलनी थी आजादी, फिर 15 अगस्त क्यों चुना गया? जानिए पूरी कहानी

अंग्रेजों द्वारा मूल रूप से जून 1948 में तय की गई सत्ता हस्तांतरण की समय-सीमा को लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा बिगड़ते हालात और तेजी से बढ़ते राजनीतिक गतिरोध को रोकने के लिए 10 महीने आगे खिसका दिया गया

Independence Day 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 14, 2026

Independence Day 2026 : भारत इस वर्ष अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूल रूप से अंग्रेजों ने भारत को छोड़कर जाने के लिए जून 1948 की समय-सीमा तय की थी? ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिरकार जो आजादी जून 1948 में मिलने वाली थी, वह पूरे 10 महीने पहले यानी 15 अगस्त 1947 को ही कैसे मिल गई? आइए, इतिहास के पन्नों को पलटकर जानते हैं कि इस तारीख के पीछे की पूरी कहानी और कारण क्या थे।

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क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?

इतिहासकारों के अनुसार, 15 अगस्त की यह तारीख अंतिम ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड लुइस माउंटबेटन द्वारा चुनी गई थी। इसके पीछे एक व्यक्तिगत और ऐतिहासिक कारण यह था कि माउंटबेटन इस तारीख को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना के आत्मसमर्पण (जिसकी दूसरी वर्षगांठ 15 अगस्त 1947 को थी) की अपनी ऐतिहासिक जीत के साथ जोड़ना चाहते थे।

1947 की शुरुआत तक भारत में ब्रिटिश शासन की पकड़ बेहद कमजोर हो चुकी थी। सत्ता के हस्तांतरण को लेकर 1946 के कैबिनेट मिशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता कराने के तमाम प्रयास विफल साबित हो चुके थे।

16 अगस्त 1946 को मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा आहूत ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ (प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस) के बाद देश में सांप्रदायिक हिंसा की आग भड़क उठी थी। कलकत्ता से शुरू हुई यह हिंसा पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के नोआखाली, बिहार और मार्च 1947 तक पंजाब के कई हिस्सों तक फैल चुकी थी। देश के हालात लगातार विस्फोटक होते जा रहे थे।

लॉर्ड वेवेल का ‘ब्रेकडाउन प्लान’ और लॉर्ड माउंटबेटन की नियुक्ति

तत्कालीन वायसराय लॉर्ड वेवेल स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली पर भारत छोड़ने की एक निश्चित तारीख तय करने का लगातार दबाव बना रहे थे।

ब्रेकडाउन प्लान: लॉर्ड वेवेल ने एक ‘ब्रेकडाउन प्लान’ पेश किया था, जिसमें चरणबद्ध तरीके से अंग्रेजों की वापसी की बात थी, जिसे जनवरी 1947 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने महसूस किया कि भारत के लिए एक नए वायसराय की आवश्यकता है।

माउंटबेटन का आगमन: यूके के संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 20 फरवरी 1947 को प्रधानमंत्री एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में घोषणा की थी कि ब्रिटेन जून 1948 से पहले भारत को सत्ता सौंप देगा। इसके बाद लॉर्ड वेवेल की जगह लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को नया वायसराय बनाकर 22 मार्च 1947 को दिल्ली भेजा गया।

10 महीने पहले आजादी मिलने की असली वजह

कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ कई हफ्तों तक चली लंबी और गहन बैठकों के बाद, माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को भारत के विभाजन का बहुप्रतीक्षित प्लान पेश किया। इस प्लान में भारत और पाकिस्तान के गठन तथा पंजाब और बंगाल के बंटवारे की रूपरेखा तय की गई थी।

माउंटबेटन द्वारा तय किए गए इस प्लान की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इससे सत्ता हस्तांतरण की तिथि पूरे 10 महीने आगे यानी अगस्त 1947 खिसक आई। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

बिगड़ते हालात: माउंटबेटन का मानना था कि यदि ब्रिटिश शासन को जून 1948 तक खींचा गया, तो उपमहाद्वीप पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भी असंभव हो जाएगा।

थकान और गतिरोध: कांग्रेस और मुस्लिम लीग, दोनों ही दल लगातार वार्ताओं से थक चुके थे और देश में शांति स्थापित करने के लिए जल्द से जल्द सत्ता का हस्तांतरण चाहते थे।

हिंसा रोकने की रणनीति: माउंटबेटन का यह सटीक आकलन था कि यदि जल्दी से देश का विभाजन और अलगाव कर दिया जाए, तो दोनों पक्षों के पास नए विवाद खड़े करने या प्रशासनिक बंटवारे के दौरान हिंसा फैलाने का मौका कम मिलेगा।

इन्हीं तमाम राजनीतिक हालातों, दूरगामी रणनीतियों और तेजी से बदलते घटनाक्रमों के चलते अंग्रेजों ने तय समय से 10 महीने पहले ही भारत छोड़ने का फैसला किया और 15 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास का सबसे स्वर्णिम और ऐतिहासिक दिन बन गया।

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