Punjab News: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों, मुलाजिमों और शिक्षकों का गुस्सा एक बार फिर से सड़क पर उतरने की तैयारी में है। राज्य की विभिन्न शिक्षक यूनियनों और कर्मचारी संगठनों द्वारा आगामी 27 अगस्त को ‘पंजाब बंद’ का आह्वान किया गया है। इस बंद को पूरी तरह सफल बनाने और अपनी लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए रणनीतिक तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। हाल ही में पंजाब मुलाजिम एवं पेंशनर्स संयुक्त फ्रंट तथा संयुक्त कर्मचारी मंच पंजाब की समन्वय समिति द्वारा चंडीगढ़ में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें इस आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी।
Punjab BJP: पंजाब BJP को मिला नया प्रभारी, सतीश पूनिया को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
वर्चुअल बैठक में बनी बंद को सफल बनाने की रणनीति
27 अगस्त के पंजाब बंद को ऐतिहासिक बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर के विभिन्न शिक्षक संगठनों की एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्यभर से आए प्रमुख शिक्षक नेताओं ने हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने पर मंथन किया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षक 27 अगस्त को सामूहिक अवकाश (Mass Casual Leave) पर रहेंगे और अपने-अपने जिलों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों तथा धरनों में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। इस आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए 17, 18 और 19 अगस्त को जिला स्तर पर विशेष बैठकों का दौर शुरू किया जाएगा, जिसमें आगे की कार्ययोजना तय होगी।
विभागीय प्रमुखों को भेजा जाएगा सामूहिक अवकाश का नोटिस
आंदोलन को पूरी तरह अनुशासित और कानूनी रूप से स्पष्ट रखने के लिए यह भी तय किया गया है कि सभी शिक्षक संगठन अपने-अपने संबंधित विभागों के प्रमुखों को पहले ही सामूहिक अवकाश का आधिकारिक नोटिस भेज देंगे।
इस महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में कई प्रमुख शिक्षक संगठनों के दिग्गज नेता शामिल हुए। इनमें गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन से सुखविंदर सिंह चाहल, गुरबिंदर सिंह ससकौर और धर्मिंदर सिंह भंगू; गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स यूनियन से सुरिंदर कुमार पुआरी और जिंदर पायलट; डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट से विक्रम देव सिंह, महिंदर कौड़ियांवाली और दिग्विजयपाल शर्मा ने अपने विचार रखे।
इसके साथ ही गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन (वैज्ञानिक) के नवप्रीत बल्ली, एससी/बीसी अध्यापक यूनियन के लछमन सिंह नबीपुर, बी.एड. अध्यापक फ्रंट के हरविंदर सिंह बिलगा, तथा मास्टर कैडर यूनियन के हरभजन सिंह, जगजीत सिंह, दलजीत सिंह और गुरमीत सिंह भुल्लर सहित कई अन्य प्रमुख प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
विभिन्न यूनियनों का मिला व्यापक समर्थन
इस आंदोलन को केवल एक या दो संगठनों तक सीमित न रखकर इसे व्यापक जन-समर्थन देने के लिए प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा से जुड़े दर्जनों संगठनों ने हाथ मिला लिया है।
बैठक में एलिमेंट्री टीचर्स यूनियन के हरजिंदर पाल सिंह पन्नू, अध्यापक दल के गुरजंट सिंह वालिया, 3704 अध्यापक यूनियन के हरजिंदर सिंह, 6635 ईटीटी अध्यापक यूनियन के सलिंदर कंबोज, लेक्चरर यूनियन के दविंदर सिंह, सी एंड वी अध्यापक यूनियन के सुखजिंदर सिंह हरिका और एसएलए यूनियन के दपतवंत सिंह सहित तमाम पदाधिकारी शामिल हुए।
इन सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली पर सीधा असर पड़ना तय है।
Punjab में सरकारी फैसलों पर असर डालने का आरोप, ED के पत्र के बाद FIR को










