Punjab News: दवाओं पर पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, पैरासिटामोल-मैट्रोनिडाजोल के बैच अलग रखने के आदेश

Punjab News: कपूरथला के सरकारी अस्पताल में मरीजों की तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद पंजाब स्वास्थ्य विभाग ने पैरासिटामोल और मैट्रोनिडाजोल के संदिग्ध बैचों का इस्तेमाल रोक दिया है। अस्पतालों को इन दवाओं का स्टॉक अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। आखिर क्या है पूरा मामला और जांच में क्या सामने आएगा?

पैरासिटामोल-मैट्रोनिडाजोल के बैच अलग रखने के आदेश

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 11, 2026

Punjab News: कपूरथला के सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद उपचार करा रही कुछ महिला मरीजों की अचानक तबीयत बिगड़ने की घटना के बाद पंजाब का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने राज्यभर में पैरासिटामोल इंफ्यूजन और मैट्रोनिडाजोल इंजेक्शन आई.वी. 5 एमजी/एमएल के संदिग्ध बैचों के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य के सभी सिविल सर्जनों को तत्काल सूचना भेजकर कहा गया है कि जिन बैचों को लेकर संदेह है, उनका अस्पतालों में किसी भी परिस्थिति में इस्तेमाल न किया जाए। साथ ही संबंधित दवाओं के स्टॉक को अलग रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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कपूरथला में कई महिला मरीजों की बिगड़ी थी हालत

बताया जा रहा है कि कपूरथला के सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद उपचाराधीन कुछ महिलाओं की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर उपचार के लिए अमृतसर स्थित गुरु नानक देव अस्पताल रेफर किया गया। जानकारी के मुताबिक कपूरथला से कुल सात महिला मरीजों को अमृतसर लाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उनका उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान एक महिला मरीज की आईसीयू में मौत हो गई।

वहीं, चार मरीजों की स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि दो अन्य मरीज अभी भी चिकित्सकीय निगरानी में उपचार करा रही हैं। एक मरीज की मौत के बाद उसके परिवार में शोक का माहौल है।

संदिग्ध दवाओं का स्टॉक किया गया अलग

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं की गुणवत्ता और संबंधित बैचों की जांच को लेकर तत्काल कदम उठाए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संदिग्ध बैचों को अस्पतालों के नियमित स्टॉक से अलग कर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए।

अमृतसर की सिविल सर्जन डॉ. रश्मि के अनुसार, विभागीय निर्देश प्राप्त होते ही जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई शुरू कर दी गई। संबंधित दवाओं का स्टॉक एकत्रित करके अलग बक्सों में रखा गया है और लाल टेप से सील कर दिया गया है, ताकि गलती से भी इनका इस्तेमाल न हो।

जांच के बाद ही सामने आएगा असली कारण

इस पूरे मामले में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मरीजों की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तव में इन दवाओं के संदिग्ध बैच जिम्मेदार हैं या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। संदिग्ध दवाओं के नमूनों की लैब जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवाओं की गुणवत्ता में कोई समस्या थी या नहीं। इसलिए फिलहाल दवाओं और मरीजों की तबीयत बिगड़ने के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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राज्यभर में निगरानी बढ़ाई गई

घटना के बाद अस्पतालों में संबंधित दवाओं के स्टॉक की जांच और निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक संदिग्ध बैच किसी मरीज को न दिए जाएं। इस घटना ने अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता जांच, स्टोरेज और सप्लाई चेन की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ होगा कि मरीजों की तबीयत बिगड़ने की वास्तविक वजह क्या थी और संदिग्ध दवाओं की भूमिका कितनी है।