Punjab News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए नई ‘थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी’ (Three-Language Policy) की घोषणा कर दी है। यह नई नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसके तहत कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इन भाषाओं को R-1, R-2 और R-3 नाम दिया गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एनसीईआरटी (NCERT) के नए पाठ्यक्रम के अनुरूप होंगी।
Punjab Politics: कांग्रेस बैठक में गूंजे ‘चन्नी जिंदाबाद’ के नारे, राजा वड़िंग ने दिया साफ संदेश
क्या है नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी और इसके नियम?
इस नई नीति के तहत छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें यह प्रावधान किया गया है कि:
दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: विद्यार्थियों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इन भाषाओं में हिंदी, कोई भी क्षेत्रीय भाषा या शास्त्रीय भाषा (Classical Language) शामिल हो सकती है।
विदेशी भाषाओं का विकल्प: छात्र फ्रेंच, जर्मन या स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं को केवल तीसरी भाषा यानी ‘R-3’ के रूप में ही चुन सकेंगे, बशर्ते उनकी पहली दो भाषाएं भारतीय हों।
अंग्रेजी की स्थिति: दिलचस्प बात यह है कि कक्षा 6वीं से अंग्रेजी को ‘विदेशी भाषा’ की श्रेणी में रखा गया है। बोर्ड का यह कदम छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति रुझान बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया
छात्रों और अभिभावकों के मन में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर कई सवाल हैं, जिन्हें सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है:
R-3 की बोर्ड परीक्षा नहीं: राहत की बात यह है कि कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा (R-3) की केंद्रीय बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी।
स्कूल स्तर पर मूल्यांकन: R-3 का मूल्यांकन संबंधित स्कूल अपने स्तर पर आंतरिक रूप से करेंगे, हालांकि इसके अंक या ग्रेड सीबीएसई के फाइनल सर्टिफिकेट में दर्ज किए जाएंगे।
फेल होने का डर नहीं: बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल तीसरी भाषा (R-3) के अंक या प्रदर्शन के कारण किसी भी विद्यार्थी को कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जाएगा। इससे छात्रों पर से अनावश्यक मानसिक दबाव कम होगा।
किन विद्यार्थियों पर लागू होगी यह व्यवस्था?
यह नई त्रि-भाषीय नीति सभी छात्रों पर एक साथ लागू नहीं होगी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है:
पहला बैच: शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी इस नई व्यवस्था का पहला बैच होंगे। यह नया बैच वर्ष 2031 में पहली बार कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के नए नियमों के तहत उत्तीर्ण होगा।
किसे मिलेगी छूट: वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं और 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर यह नई व्यवस्था लागू नहीं होगी। वे पुरानी व्यवस्था के तहत ही अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे।
अभिभावकों के लिए विशेष सलाह
सीबीएसई बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस नीति से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा, बल्कि उनकी भाषाई समझ और कौशल में वृद्धि होगी। बोर्ड ने अभिभावकों और छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें। इस नीति से जुड़ी हर आधिकारिक और सटीक जानकारी के लिए केवल सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) का ही उपयोग करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुविधा न हो।
Punjab News: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, DA भुगतान पर कोर्ट का आदेश










