
Punjab Crime News: पंजाब के मानसा में ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की नृशंस हत्या के बाद पिछले तीन हफ़्तों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। पंजाब सरकार और प्रदर्शनकारी परिजनों के बीच बनी आपसी सहमति के बाद 22 दिनों से चल रहा धरना-प्रदर्शन गुरुवार को आधिकारिक रूप से खत्म हो गया। इस समझौते के साथ ही परिवार ने शव के पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
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पोस्टमार्टम प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारी

आज शुक्रवार (6 नवंबर) को परिजनों की सहमति के बाद शव को विधिपूर्वक पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मानसा के सिविल अस्पताल के डॉ. रंजीत राय ने बताया कि पुलिस के आधिकारिक अनुरोध पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए शव को PGI (पीजीआई) भेजा गया है।
प्रशासनिक नियमों के अनुसार पोस्टमार्टम सूर्योदय और आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद शुरू किया जाता है। डॉक्टरों की टीम सुबह 9:00 बजे के बाद प्रक्रिया शुरू करेगी। पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद शव को परिजनों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारी की जाएगी।
किन शर्तों पर खत्म हुआ 22 दिनों का आंदोलन?
झोटा के परिवार और पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के बीच मानसा में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। सरकार द्वारा स्वीकार की गई मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं, दिवंगत परविंदर सिंह झोटा के परिवार को ₹2 करोड़ का मुआवजा तथा उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया गया है। धरना-प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले एक अन्य व्यक्ति दलजीत सिंह के परिवार को ₹50 लाख का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है और दर्ज किए गए प्रशासनिक मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।मामले की जांच पहले ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा चुकी है, जो वर्तमान में इस केस पर तेजी से काम कर रही है।
क्या था पूरा मामला और लापरवाही पर कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि 13 अक्टूबर 2026 को मानसा स्थित एक मेडिकल स्टोर के भीतर ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में आक्रोश का माहौल था और परिवार लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तथा CBI जांच की मांग पर अड़ा हुआ था।
सुरक्षा और कर्तव्यों में कोताही बरतने के आरोप में पंजाब सरकार पहले ही संबंधित DSP हरजिंदर सिंह गिल और ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को निलंबित कर चुकी है। अब सरकार के साथ बने लिखित सहमति पत्र के बाद मानसा में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
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