Punjab News: सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब बंद, अमृतसर में जनजीवन और परिवहन पर असर

पंजाब में शुक्रवार सुबह अचानक बाजारों की रौनक गायब दिखी, बस अड्डों पर सन्नाटा छा गया और हजारों लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कई संगठनों ने एकजुट होकर बंद का समर्थन किया? जानिए बंदी सिखों की रिहाई से जुड़े पूरे विवाद की कहानी।

सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब बंद

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 21, 2026

Punjab News: सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा शुक्रवार को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित इस बंद का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला। अमृतसर में भी बंद का प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आया, जहां बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की गतिविधियां प्रभावित रहीं। बंद के कारण दैनिक कामकाज के लिए घरों से निकले लोगों और यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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बाजारों और व्यावसायिक गतिविधियों में दिखी सुस्ती

बंद के समर्थन में कई व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे। शहर के प्रमुख कारोबारी इलाकों में सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम गतिविधियां दिखाई दीं। कई दुकानदारों और व्यापारिक संगठनों ने बंद को समर्थन देते हुए अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इसके चलते खरीदारी और अन्य जरूरी कामों के लिए पहुंचे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

बस सेवाओं और यात्रियों पर पड़ा असर

पंजाब बंद का असर अमृतसर के बस अड्डे पर भी साफ दिखाई दिया। हालांकि कुछ लंबी दूरी की बसें सुबह अपने निर्धारित समय पर रवाना हो गई थीं, लेकिन दिन चढ़ने के साथ यात्रियों की संख्या बेहद कम हो गई। बस अड्डे पर सामान्य दिनों की तरह भीड़-भाड़ नहीं थी और कई रूटों पर यात्री नहीं मिलने से परिवहन सेवाएं प्रभावित रहीं। एक बस चालक ने बताया कि वह कपूरथला से बस लेकर अमृतसर पहुंचा था, लेकिन पूरे रास्ते में उसे गिने-चुने यात्री ही मिले। अमृतसर बस स्टैंड पहुंचने के बाद भी यात्रियों की संख्या काफी कम थी। उनके अनुसार बंद का सीधा असर बस संचालन और यात्रियों की आवाजाही पर पड़ा है।

कई संगठनों ने दिया समर्थन

कौमी इंसाफ मोर्चा के बंद को विभिन्न सिख और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), शिरोमणि अकाली दल अमृतसर, अकाली दल वारिस पंजाब और अन्य कई सिख संगठनों ने इस बंद का समर्थन किया। इसके अलावा विभिन्न किसान संगठनों ने भी लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से बंद में सहयोग करने की अपील की।

कैद सिखों की रिहाई को लेकर उठी मांग

अकाली दल वारिस पंजाब के अमृतसर मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता शमशेर सिंह पंधेर ने कहा कि जेलों में बंद कई सिख कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इन कैदियों की रिहाई की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और कौमी इंसाफ मोर्चा इसी मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कैद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की थी। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया गया, जिसके विरोध में यह बंद आयोजित किया गया है।

यात्रियों को हुई परेशानी

बस अड्डे पर पहुंचे कई यात्रियों ने बताया कि वे जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करने निकले थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें पंजाब बंद की जानकारी मिली। बस सेवाएं प्रभावित होने के कारण उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने कहा कि बसों की कमी और परिवहन व्यवस्था में बाधा आने से वे असमंजस की स्थिति में हैं।

शांति बनाए रखने की अपील

कौमी इंसाफ मोर्चा और बंद का समर्थन करने वाले संगठनों ने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना है। उन्होंने सभी समर्थकों से आग्रह किया कि बंद के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि से दूर रहें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। पंजाब बंद के दौरान अमृतसर सहित राज्य के कई क्षेत्रों में सिख कैदियों की रिहाई को लेकर विभिन्न गतिविधियां देखने को मिलीं। अब इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संगठनों की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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