Public Examinations Amendment Bill 2026: देश भर में नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधलियों और जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर भड़के छात्र आंदोलनों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक विधायी कदम उठाया है। सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ (Public Examinations Amendment Bill, 2026) को आधिकारिक रूप से पेश किया। इस बिल के आते ही सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया, जिसके चलते लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया।
विपक्षी दलों के हंगामे पर किरेन रिजिजू का तीखा पलटवार
बताते चले कि, सदन में हो रहे भारी विरोध और हंगामे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश भर के करोड़ों छात्रों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं से हमेशा के लिए निपटने के लिए यह अहम बिल लेकर आई है, लेकिन विपक्ष इस पर सार्थक चर्चा करने के बजाय केवल हंगामा कर रहा है। रिजिजू ने अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए टास्क फोर्स के गठन और कड़े प्रावधानों जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। यदि ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी संसद में बहस नहीं होगी, तो देश में गलत संदेश जाएगा, इसलिए विपक्ष को राजनीति छोड़कर छात्रों के हित में सहयोग करना चाहिए।
2024 के मूल कानून में बड़े बदलाव
यह नया संशोधन विधेयक वर्ष 2024 के मूल सार्वजनिक परीक्षा कानून में मौजूद तमाम खामियों और कानूनी पेचोखियों को दूर करने के लिए लाया गया है, ताकि नकल माफियाओं में खौफ पैदा किया जा सके। इस नए विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के तहत संगठित रूप से पेपर लीक करने वाले गिरोहों और दोषियों के लिए 10 साल तक की कठोर जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, मामलों का त्वरित और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए विशेष ‘फास्ट-ट्रैक अदालतों’ के गठन की बात कही गई है, जो चार्जशीट दाखिल होने के महज 3 महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुनाएंगी। साथ ही, जांच एजेंसियों के लिए भी यह अनिवार्य किया गया है कि वे किसी भी पेपर लीक मामले की जांच अधिकतम 2 महीने के भीतर पूरी कर लें।










