Dharmendra Pradhan Resignation: नीट (NEET) परीक्षा विवाद और देश भर की सड़कों पर उतरे छात्रों के भारी जनदवाब के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा है। इस बड़े और सनसनीखेज सियासी घटनाक्रम के सामने आने के बाद कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस इस्तीफे को देश के युवाओं के अदम्य साहस और अडिग संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया है, साथ ही दो टूक शब्दों में कहा है कि अब इस देश में तानाशाही और जनविरोधी नीतियां नहीं चल सकती।
प्रियंका गांधी ने जनता की ताकत पर जताई खुशी
बताते चले कि, अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रियंका गांधी ने गहरी संतुष्टि और खुशी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे मुख्य वजह यह है कि आज हमारे देश के आम नागरिकों और युवाओं ने उन ताकतों से अपना देश वापस लेना शुरू कर दिया है, जिन्होंने कथित तौर पर संविधान को नष्ट करने और जनता की हर आवाज को दबाने की हरसंभव कोशिश की थी। उनके अनुसार, यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
छात्रों के गांधीवादी आंदोलन और बलिदान की सराहना
छात्रों द्वारा चलाए गए शांतिपूर्ण और गांधीवादी आंदोलन की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह भारत के युवाओं की प्रत्यक्ष विजय है और उन्हें देश के इन नौनिहालों पर गर्व है। उन्होंने याद दिलाया कि किस प्रकार इन छात्रों पर पैलेट गन चलाई गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं। कई युवाओं को गंभीर चोटें आईं, इसके बावजूद वे अपने हक के लिए अड़े रहे और झुके नहीं। अंततः सरकार को ही इन युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे झुकना पड़ा।
“यह लोकतंत्र है, यहाँ जनता की इच्छा ही सर्वोपरि है”
इस पूरे प्रकरण को सत्ता और शासन चलाने वालों के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश बताते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह आज और हमेशा के लिए हर शासक के लिए एक बड़ा सबक है। आपको हर हाल में जनता की आवाज और उनकी इच्छा को सुनना ही होगा। यह एक लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता की मर्जी ही सर्वोपरि होती है। इतिहास गवाह है कि कोई भी तानाशाह या सत्ता का घमंड भारतीय नागरिकों की सामूहिक इच्छाशक्ति को रोक नहीं सकता, और आज देश के छात्रों ने इस बात को व्यावहारिक रूप से साबित कर दिखाया है।
पीएम आवास के बाहर मंगलवार का ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’
गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार, 21 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और परीक्षा तंत्र में धांधली के विरोध में पूरा विपक्ष मुखर हो गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की सीधी अगुवाई में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) का घेराव कर दिया था। इस हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल हुए थे। कड़ी सुरक्षा वाले उस वीवीआईपी क्षेत्र में लगभग तीन घंटे तक जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा चला, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने ऐक्शन लेते हुए सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया था।










