Student Protest: राम मंदिर जांच से लेकर पेपर लीक तक, प्रियंका चतुर्वेदी का बीजेपी पर तीखा हमला

शिवसेना (उद्धव) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने छात्र आंदोलन, पेपर लीक, तीन-भाषा नीति, राम मंदिर से जुड़े कथित विवाद और संसद में जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार से जवाब मांगा।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 5, 2026

Student Protest: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर कई अहम मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने छात्र आंदोलन, बेरोजगारी, पेपर लीक, तीन-भाषा नीति, क्षेत्रीय भाषाओं, राम मंदिर से जुड़े कथित विवाद और विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई जैसे विषयों पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जनता लगातार सवाल पूछ रही है, लेकिन सरकार जवाबदेही और पारदर्शिता से बचने की कोशिश कर रही है।

प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर हमला

राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि छात्रों को माफी नहीं बल्कि जवाब चाहिए, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रों का असंतोष सरकार के रवैये का परिणाम है। उनके अनुसार, छात्रों की समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं किया गया, जिसकी वजह से देशभर में नाराजगी का माहौल बना हुआ है।उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इन घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए।

पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों, विशेषकर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और उनके परिवारों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए, क्योंकि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे सीधे युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं।

तीन-भाषा नीति और क्षेत्रीय भाषाओं पर बीजेपी को घेरा

तीन-भाषा नीति और क्षेत्रीय भाषाओं के मुद्दे पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश की भाषाई विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय भाषा की अनदेखी करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।उन्होंने आरोप लगाया कि एक जैसी सोच और भाषा को पूरे देश पर थोपने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक और भाषाई विविधता में है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रियंका चतुर्वेदी की मांग

सैनिक स्कूलों की चयन प्रक्रिया और अन्य सरकारी व्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के साथ लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए।उनका कहना था कि जब सरकार पारदर्शिता से दूरी बनाती है, तब विरोध प्रदर्शन बढ़ते हैं और जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

राम मंदिर विवाद और निष्पक्ष जांच की मांग

राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप लगे हैं, तो उनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

झारखंड छात्र आंदोलन और युवाओं की मांगों का किया समर्थन

झारखंड में पेपर लीक और भर्ती परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और निष्पक्ष कार्रवाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों से पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, इसलिए इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक नीति की जरूरत है।

संसद में जवाबदेही की मांग, सरकार से जवाब देने की अपील

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि लोकतंत्र में संसद सबसे बड़ा जवाबदेही का मंच है और सरकार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर वहीं जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक नेतृत्व आगे रहता है, तो जवाबदेही के समय भी उसे सामने आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और राम मंदिर जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार को स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।