Press Freedom Index 2026 : भारत की रैंकिंग में भारी गिरावट, पाकिस्तान से भी पिछड़ा देश

क्या भारत में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ खतरे में है? रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की साल 2026 की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। भारत की रैंकिंग में आई ऐतिहासिक गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्या वजह है कि भारत अब पाकिस्तान और कंबोडिया जैसे देशों से भी पीछे हो गया है? पूरी रिपोर्ट जानने के लिए अंदर पढ़ें।

Press Freedom Index 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 1, 2026

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Press Freedom Index 2026 :  रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी की गई 2026 की वार्षिक रिपोर्ट ने भारतीय मीडिया जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस ताजा इंडेक्स के अनुसार, दुनिया के 180 देशों में भारत की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले 6 पायदान नीचे खिसक कर 157वें स्थान पर पहुँच गई है। यह गिरावट इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि भारत अब अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान (153) से भी पीछे हो गया है। 3 मई को मनाए जाने वाले ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे’ से ठीक पहले आई यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता के गिरते स्तर को रेखांकित करती है।

वैश्विक स्तर पर मीडिया की स्वतंत्रता का संकट

RSF की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मीडिया की आजादी के लिए स्थितियाँ चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। सर्वे में शामिल आधे से अधिक देशों में प्रेस की स्वतंत्रता को ‘मुश्किल’ या ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। पिछले 25 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब 180 देशों और क्षेत्रों का औसत स्कोर इतना खराब रहा है। यह डेटा दर्शाता है कि सूचनाओं के निर्बाध प्रवाह और पत्रकारों की सुरक्षा पर वैश्विक स्तर पर अंकुश लगाने की कोशिशें तेज हुई हैं।

भारत के उतार-चढ़ाव भरे पिछले कुछ साल

यदि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत की रैंकिंग में निरंतर अस्थिरता देखी गई है। वर्ष 2024 में भारत 159वें स्थान पर था, जहाँ से 2025 में मामूली सुधार के साथ यह 151वें पायदान पर पहुँचा था। हालांकि, 2026 में यह फिर से गिरकर 157वें नंबर पर आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान, फिलिस्तीन, भूटान और सीरिया जैसे देश, जो 2025 में भारत से नीचे थे, इस साल की रैंकिंग में भारत से ऊपर निकल गए हैं। भारत के बाद की सूची में वेनेजुएला, सूडान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देश शामिल हैं, जबकि नॉर्वे ने एक बार फिर अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।

गिरावट के मुख्य कारण और सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ

रिपोर्ट में भारत की इस गिरती स्थिति के पीछे कई गंभीर कारणों का उल्लेख किया गया है। RSF के अनुसार, भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों (National Security Laws) का उपयोग पत्रकारों के खिलाफ तेजी से बढ़ा है। फील्ड में जाकर लाइव रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अक्सर सीधा निशाना बनाया जाता है या उन्हें लंबी कानूनी लड़ाइयों में उलझा दिया जाता है। काम करने का यह कठिन माहौल स्वतंत्र पत्रकारिता की राह में एक बड़ा अवरोध बनकर उभरा है, जिससे मीडिया संस्थान दबाव में काम करने को मजबूर हैं।

किन मापदंडों पर तैयार की गई है यह रिपोर्ट?

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का निर्धारण केवल एक पहलू के आधार पर नहीं होता। RSF ने स्पष्ट किया है कि देशों की रैंकिंग तय करने के लिए पांच प्रमुख संकेतकों (Criteria) का उपयोग किया जाता है:

  1. राजनीतिक संदर्भ: सत्ता का मीडिया पर प्रभाव।
  2. कानूनी ढांचा: पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून।
  3. आर्थिक स्थिति: मीडिया संस्थानों की वित्तीय स्वतंत्रता।
  4. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव: समाज का मीडिया के प्रति नजरिया।
  5. सुरक्षा: पत्रकारों पर होने वाले हमले और कानूनी प्रताड़ना। इन्हीं आधारों पर भारत का सुरक्षा और कानूनी स्कोर सबसे चिंताजनक पाया गया है, जिसके कारण रैंकिंग में यह बड़ी गिरावट आई है।

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